
वर्धा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वर्धा जिले के आर्वी में आयोजित एक समारोह में बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि दिसंबर 2026 तक राज्य के 80 प्रतिशत किसानों को सालभर हर दिन 12 घंटे मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी, साथ ही अगले पांच वर्षों में आम नागरिकों के बिजली बिलों में हर वर्ष कटौती की जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्धा जिले में अपर वर्धा परियोजना, वाढवण-पिंपळखुटा सिंचाई योजना जैसी प्रमुख योजनाओं के जरिए कृषि के लिए पर्याप्त पानी और बिजली मुहैया कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने समृद्धि महामार्ग पर MIDC की स्थापना की घोषणा भी की, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आर्वी में मुख्यमंत्री फडणवीस के हाथों नई प्रशासनिक इमारत का लोकार्पण और 720 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्यों का ई-लोकार्पण व भूमिपूजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री व पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर, सांसद अमर काले, विधायक दादाराव केचे, सुमीत वानखेडे, समीर कुणावर, राजेश बकाने, पूर्व सांसद रामदास तडस, जिलाधिकारी वान्मथी सी., और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितीन रहमान उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की वर्षों से मांग थी कि उन्हें खेती के लिए नियमित 12 घंटे बिजली मिले, जिसे राज्य सरकार ने प्राथमिकता दी है और अब दिसंबर 2026 तक 80 प्रतिशत किसानों को यह सुविधा मिलेगी। साथ ही 2025 से 2030 के बीच बिजली उपभोक्ताओं के बिल हर साल घटाने की कार्ययोजना पर अमल शुरू हो चुका है। 300 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले मध्यम वर्गीय और गरीब परिवारों को सौर ऊर्जा के माध्यम से मुफ्त बिजली दी जाएगी। वहीं, वर्धा जिले में विकास को नई गति देने के लिए अपर वर्धा परियोजना से 500 मेगावाट बिजली उत्पादन और वाढवण-पिंपळखुटा योजना को जल्द मंजूरी दी जाएगी। समृद्धि महामार्ग के कारण वर्धा जिले को औद्योगिक प्रगति का नया आयाम मिलेगा। सरकार समृद्धि महामार्ग के विरुळ नोड को मंजूरी देकर वहां MIDC की स्थापना करेगी, जिससे उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि दावोस में हुए वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम में महाराष्ट्र के लिए 16.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश करार हुए हैं, जिनमें से 7 लाख करोड़ रुपये केवल विदर्भ के लिए हैं। वर्धा, चंद्रपुर, गढ़चिरौली और नागपुर में लौह अयस्क आधारित उद्योगों को विशेष रियायतें दी जाएंगी और गढ़चिरौली को स्टील कैपिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, वर्धा समेत विदर्भ के 10 जिलों के सूखाग्रस्त इलाकों को जलसमृद्ध करने के लिए वैनगंगा-नळगंगा नदी जोड़ परियोजना शुरू की जा रही है, जिसमें गोसीखुर्द बांध के 62 टीएमसी अतिरिक्त पानी से 550 किलोमीटर लंबी नई नदी तैयार की जाएगी। इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और सभी अनुमतियाँ प्राप्त हो चुकी हैं। इसका कार्य इस वर्ष के अंत या अगले वर्ष की शुरुआत में शुरू होगा। मुख्यमंत्री फडणवीस की ये घोषणाएं राज्य के किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों को राहत देने के साथ-साथ विदर्भ क्षेत्र को समृद्ध बनाने के लिए एक मजबूत और दूरदर्शी कदम के रूप में देखी जा रही हैं।




