
मुंबई। राज्य में दूध और दुग्धजन्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट को रोकने के लिए मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने बड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और आईआईटी को मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित उन्नत प्रणाली विकसित करने के लिए कहा है, जिससे दूध में मिलावट की सटीक और तेज पहचान हो सके। गुरुवार को वर्षा निवास पर आयोजित बैठक में एनडीडीबी के अध्यक्ष मीनेश शाह ने राज्य में चल रही डेयरी परियोजनाओं की जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य में केवल 40 प्रतिशत दूध संगठित क्षेत्र के माध्यम से प्रोसेस होता है, जबकि शेष दूध असंगठित क्षेत्र से आता है, जहां मिलावट की संभावना अधिक रहती है। इसी को देखते हुए सरकार अधिक से अधिक गांवों और उत्पादकों को संगठित डेयरी नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दे रही है। देशभर में 75 हजार नए गांवों को सहकारी ढांचे से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि दूध में यूरिया और अन्य मिलावट की पहचान के लिए विशेष टेस्ट स्ट्रिप विकसित की गई है, जो अगले छह महीनों में पूरी तरह लागू हो जाएगी। इसके साथ ही एआई आधारित तकनीक के उपयोग से मिलावट की पहचान और निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। एनडीडीबी अध्यक्ष मीनेश शाह ने बताया कि राज्य सरकार के सहयोग से ‘महानंद’ डेयरी के पुनरुद्धार का कार्य तेज गति से चल रहा है और लगभग 78 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। 3 लाख लीटर क्षमता का नया ग्रीनफील्ड डेयरी प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा मुंबई के आरे कॉलोनी में कंप्रेस्ड बायोगैस प्रोजेक्ट, उदगीर और नागपुर (बुटीबोरी) में अत्याधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विदर्भ और मराठवाड़ा के 19 जिलों में दूध संग्रहण बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही, दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए ‘एनपीडीडी’ योजना के तहत अत्याधुनिक प्रयोगशाला भी स्थापित की गई है। यह पहल न केवल दूध में मिलावट रोकने में सहायक होगी, बल्कि डेयरी क्षेत्र को संगठित, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।




