
मुंबई। संत तुकाराम महाराज के अभंग “घेईन मी जन्म याजसाठीं देवा, तुझी चरणसेवा साधावया” से प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संकल्पना के तहत मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मादाय अस्पताल सहायता कक्ष द्वारा शुरू किया गया ‘चरणसेवा’ अभियान अब महाराष्ट्र में वारकरियों के लिए एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। यह पहल आषाढ़ी वारी के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। आषाढ़ी वारी के दौरान हजारों वारकरी सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर पंढरपुर पहुंचते हैं। लंबी यात्रा के कारण पैरों में दर्द, छाले, मांसपेशियों में खिंचाव, थकान और मानसून के दौरान संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए इस अभियान की शुरुआत की गई। विशेष बात यह है कि इस सेवा को केवल “पैरों की मालिश” न कहकर संत परंपरा के अनुरूप ‘चरणसेवा’ नाम दिया गया, जो सेवा, समर्पण और श्रद्धा का प्रतीक है। मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मादाय अस्पताल सहायता कक्ष ने इस अभियान में सरकारी विभागों, चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और हजारों स्वयंसेवकों को एक मंच पर लाकर स्वास्थ्य सेवा का व्यापक नेटवर्क तैयार किया। उद्योग समूहों और समाजसेवी संस्थाओं ने दवाइयां, आयुर्वेदिक तेल, चिकित्सा सामग्री, पेयजल और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर इस अभियान को जनसहभागिता का स्वरूप दिया। वर्ष 2025 में सातारा, पुणे, सोलापुर, नाशिक, जालना, बीड और धाराशिव सहित 7 जिलों के 337 सेवा केंद्रों पर यह अभियान चलाया गया। 219 स्वास्थ्य संस्थानों के सहयोग से 9,475 डॉक्टरों, फिजियोथेरेपिस्ट, नर्सों, पैरामेडिकल कर्मचारियों, मेडिकल विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने करीब 1.75 लाख वारकरियों को प्रत्यक्ष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कीं, जबकि 10 लाख से अधिक लोगों तक निवारक स्वास्थ्य का संदेश पहुंचाया गया। अभियान की सफलता को देखते हुए 2026 में इसका विस्तार 12 जिलों तक किया गया। सातारा, पुणे, सोलापुर और नाशिक के साथ बुलढाणा, अकोला, जालना, बीड, नांदेड़, छत्रपति संभाजीनगर, वाशिम और अहिल्यानगर को भी इसमें शामिल किया गया। लगभग 190 पड़ावों और 400 सेवा केंद्रों पर औषधीय आयुर्वेदिक तेल से चरणसेवा, फिजियोथेरेपी, स्वास्थ्य परीक्षण, दवाइयों का वितरण, प्राथमिक उपचार, एम्बुलेंस सुविधा तथा जरूरत पड़ने पर रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस वर्ष 12 हजार से अधिक डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, मेडिकल विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने अभियान में भाग लिया। अभियान के तहत आठ स्वास्थ्य जागरूकता रथों के माध्यम से स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, मानसूनी एवं संक्रामक रोगों से बचाव, रक्तदान, अंगदान, स्वस्थ जीवनशैली तथा सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति भी व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। इससे आषाढ़ी वारी केवल आध्यात्मिक यात्रा ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य जागरूकता का भी प्रभावी माध्यम बन गई। मुख्यमंत्री सहायता निधि एवं धर्मादाय अस्पताल सहायता कक्ष के प्रमुख रामेश्वर नाईक ने कहा कि ‘चरणसेवा’ अब केवल एक स्वास्थ्य सेवा नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की संत परंपरा, जनसहभागिता और आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का सशक्त संगम बन चुकी है। यह पहल भविष्य में देश की अन्य बड़ी धार्मिक यात्राओं के लिए भी प्रेरणादायी मॉडल साबित हो सकती है।

