
मुंबई। राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अधिक गुणवत्तापूर्ण, छात्र-केंद्रित और प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों के अनुभवों और सुझावों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। यह विश्वास राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने व्यक्त किया। बुधवार को वे महाराष्ट्र राज्य जवाहर बालभवन, चर्नी रोड में आयोजित ‘शिक्षण संवाद-2026’ के विचार-मंथन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर शिक्षण आयुक्त सच्छिंद्रप्रताप सिंह, जवाहर बालभवन की निदेशक नीता पाटील, राज्यभर के शिक्षक, शिक्षा विशेषज्ञ, शिक्षा अधिकारी तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञ उपस्थित थे। शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि सरकार शिक्षकों के अनुभव, समस्याएं और सुझाव सीधे सुनना चाहती है, क्योंकि कक्षा में कार्यरत शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण मार्गदर्शक हैं। उन्हीं के अनुभवों के आधार पर भविष्य की शिक्षा नीतियों को अधिक सक्षम और परिणामकारी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान देने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कारित, जिम्मेदार और राष्ट्रभक्त नागरिक तैयार करने का सशक्त माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बचपन से ही विद्यार्थियों में देशभक्ति, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय मूल्यों का विकास शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। भुसे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे तथा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विद्यार्थियों, शिक्षकों और संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। विचार-मंथन में प्राप्त सभी सकारात्मक सुझावों और सिफारिशों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे दिन विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के सत्र आयोजित किए गए। इनमें अध्ययन-अध्यापन में नवाचार एवं शैक्षणिक गुणवत्ता, स्कूलों में योग एवं अध्यात्म, सैन्य शिक्षा का प्रभावी क्रियान्वयन, कला, खेल एवं अभिनय गतिविधियां, रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा अभियान, तथा सरकारी योजनाओं की वर्तमान स्थिति, चुनौतियां और संभावनाएं जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र को भविष्य उन्मुख और अधिक सशक्त बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

