
पुलिस, सीबीआई और जज के नाम पर डराने वाले साइबर अपराधियों से रहें सावधान; ‘डिजिटल अरेस्ट’ जागरूकता फिल्म और ‘1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम’ लॉन्च
मुंबई। साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई और जज के नाम का इस्तेमाल कर नागरिकों को डरा-धमकाकर ठगी का शिकार बना रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी दबाव या डर में न आएं और साइबर धोखाधड़ी का पता चलते ही तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। बुधवार को मुख्यमंत्री फडणवीस सह्याद्री अतिथि गृह में महाराष्ट्र साइबर द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने साइबर जागरूकता लघु फिल्म ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम’ लॉन्च किया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर, गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव मनीषा म्हैसकर, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्र, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर) संजय शिंत्रे, मुख्यमंत्री के निवेश सलाहकार कौस्तुभ धवसे और महाराष्ट्र साइबर सेल प्रमुख यशस्वी यादव सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
साइबर ठगी के बाद ‘गोल्डन आवर’ बेहद महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी होने के बाद शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन आवर’ बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान शिकायत दर्ज होने पर ठगी की रकम को रोकने या वापस हासिल करने की संभावना अधिक रहती है। यदि शिकायत दर्ज करने में तीन से 15 दिन की देरी होती है तो रकम कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर हो जाती है, जिसके बाद उसकी वसूली बेहद मुश्किल हो जाती है। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी व्यक्ति को अपने साथ साइबर ठगी होने का एहसास हो, उसे बिना समय गंवाए 1930 पर संपर्क करना चाहिए।
पुलिस और सीबीआई के नाम पर डराकर ठगी
फडणवीस ने कहा कि मोबाइल, ऑनलाइन लेनदेन, विभिन्न पेमेंट गेटवे और डिजिटल मीडिया अब दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। तकनीक ने जहां जीवन आसान किया है, वहीं साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ा है। साइबर अपराधी पार्सल में ड्रग्स मिलने का डर दिखाने, ओटीपी फ्रॉड, फर्जी फोन कॉल और पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनकर धमकाने जैसे अलग-अलग हथकंडों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई बार स्क्रीन पर खाकी वर्दी पहने व्यक्ति, कथित पुलिस अधिकारी या जज को देखकर सामान्य नागरिक डर जाते हैं और अपराधियों के निर्देशों का पालन कर अपनी रकम गंवा बैठते हैं। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से कहा कि किसी भी फोन या वीडियो कॉल पर पुलिस, सीबीआई अथवा किसी अन्य सरकारी एजेंसी का नाम लेकर डराया जाए तो घबराएं नहीं और बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर न करें।
एआई, डीपफेक और वॉयस क्लोनिंग बनी नई चुनौती
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ वॉयस क्लोनिंग, डीपफेक और फर्जी ऑडियो-वीडियो साइबर सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन गए हैं। इनसे निपटने के लिए नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने के साथ पुलिस तंत्र को भी आधुनिक तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता है। अभिनेता, कलाकार और गायक जैसे लोकप्रिय चेहरे इस संदेश को आम नागरिकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचा सकते हैं।
सोशल मीडिया पर चलेगा व्यापक जागरूकता अभियान
कार्यक्रम में 42 मिनट की जागरूकता फिल्म ‘डिजिटल अरेस्ट’ के साथ छोटी क्लिप और रील के जरिए सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान चलाने पर जोर दिया गया, ताकि साइबर अपराध से बचाव का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। ‘डिजिटल अरेस्ट’ फिल्म और ‘1930 महाराष्ट्र साइबर एंथम’ में आशीष विद्यार्थी, पंकज त्रिपाठी, शरद केलकर, सोनाली बेंद्रे, जावेद जाफरी, सुनिधि चौहान, अभिषेक बनर्जी, मंगेश देसाई और समय रैना सहित कई कलाकारों ने योगदान दिया है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने इन कलाकारों को सम्मानित भी किया। इस दौरान महाराष्ट्र साइबर सेल प्रमुख यशस्वी यादव ने प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तावित ‘महाराष्ट्र साइबर सेफ ऐप’ और ‘आशा कॉल बोट’ परियोजना की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सरकार, पुलिस, कलाकारों और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से महाराष्ट्र में व्यापक साइबर जागरूकता अभियान को सफल बनाया जा सकेगा।

