Friday, May 22, 2026
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पुस्तक चर्चा: नमामि देवि नर्मदे

विवेक रंजन श्रीवास्तव
देवनदी नर्मदा को समर्पित एक अद्भुत, वैश्विक काव्य संकलन नमामि देवी नर्मदे का प्रकाशन श्री मृत्युंजय आश्रम , अमरकंटक से हुआ है। इस पुस्तक का संपादन डॉ.सुनील परीट ने किया है। यह ग्रंथ केवल शब्द रचना नहीं है। यह श्रद्धा और भक्ति संपन्न भावधारा का अनूठा प्रवाह है। इस संग्रह में देश विदेश के कवियों की मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा और भावनाएं काव्य विधा में शामिल हैं। हर रचनाकार ने माँ नर्मदा के प्रति अपनी गहरी निष्ठा व्यक्त की है।
पुस्तक के कंटेंट में एक सौ सड़सठ कविताएं संकलित हैं। सभी रचनाएं मौलिक और बेहद प्रभावशली हैं। इस संग्रह का बहुत बड़ा सांस्कृतिक महत्व है। यह पुस्तक सनातन धर्म की साहित्यिक विरासत को समृद्ध करती है। नर्मदा मैया का पावन सौंदर्य और महिमा इसके पन्नों में जीवंत हो उठी है। संग्रह से चयनित पहली कविता मुकेश कुमार ऋषि वर्मा की है। वे लिखते हैं कि अमरकंठ से निकली तेरी महिमा अपरंपार है। सहज सरल ममता की मूरत तू वरदानी है। इस अंश में कवि ने नर्मदा की ममतामयी छवि को उकेरा है। पानी को अमृत बताकर लोक कल्याण की बात कही गई है।
दूसरी कविता पण्डित अंशुल विश्वंभर मिश्र कदम की है। उनकी पंक्तियां हैं कि भेड़ाघाट जबलपुर में बहती कल कल मातु नरमदे। शिव कन्या है नाम तुम्हारा देती है संबल। यहां कवि ने नर्मदा के स्थानीय भौगोलिक सौंदर्य और आध्यात्मिक रूप का सुंदर मेल प्रस्तुत किया है। तीसरी कविता डॉ अरुणा अग्रवाल की है। वे लिखती हैं कि नर्मदा मैया निकली हैं पुनीत अमरकंटक से। पाप ताप संताप हरे युगों युगों से है पूजित। इस अंश में नदी के पौराणिक और कष्टहरणी स्वरूप को रेखांकित किया गया है। हर व्यक्ति के दुखों को दूर करने की सामर्थ्य इसमें दिखती है। चौथी कविता डॉ. परमानंद शुक्ल की है। उनकी पंक्ति है कि तुम केवल जलधारा नहीं संस्कृति की पहचान हो तुम। भारत की आत्मा में बसी अमर और महान हो तुम। कवि ने नर्मदा को सिर्फ एक भौगोलिक नदी नहीं माना है। उसे भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान के रूप में स्थापित किया है। पांचवीं कविता वीरेंद्र कुमार साहू की है। वे लिखते हैं कि सरिता की कल कल ध्वनि मधुर स्वर में तान सुनाती। नमामि देवी नर्मदे शत शत वंदन है। इस अंश में प्रकृति के संगीतात्मक रूप और मानवीय कृतज्ञता का सुंदर चित्रण है। नदी का संगीत मन को असीम शांति प्रदान करता है। इसी तरह प्रत्येक कवि की प्रस्तुति विशिष्ट तथा संगीत के साथ प्रस्तुत करने योग्य है। आशा है कि संकलन कर्ता इसके सांगीतिक संस्करण को यू ट्यूब पर प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे। यह संग्रह पाठकों के मन में मां नर्मदा के लिए भक्ति भाव का संचार करता है। नर्मदा को क्षेत्र की जीवन रेखा कहा जाता है, उसके प्रति प्रदूषण मुक्ति और पर्यावरण चेतना जगाने में भी यह कृति सामूहिक साहित्यिक प्रयास है। रचनाओं की भाषा सरल, सुबोध और सीधे दिल को छूने वाली है। संपादक का प्रयास अत्यंत सराहनीय और स्तुत्य है। हर नर्मदा प्रेमी के लिए यह पुस्तक संग्रहणीय है। 

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