
सूचना मांगने वालों को किया जा रहा गुमराह, निरीक्षण के नाम पर बुलाकर अधिकारी रहते हैं गायब
क्या बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े पदमाकर चव्हाण के कार्यक्षेत्र में हुए विकास कामों की निष्पक्ष जांच कराएंगी?
मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि आर-मध्य विभाग में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की खुलेआम अनदेखी की जा रही है और जानकारी मांगने वाले नागरिकों को नियमों के अनुसार सूचना उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें गुमराह किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, आर-मध्य विभाग के सहायक अभियंता पदमाकर चव्हाण आरटीआई आवेदकों को समय पर जानकारी देने के बजाय निरीक्षण के नाम पर कार्यालय बुलाते हैं। आवेदकों को शाम 3 से 5 बजे के बीच आने के लिए कहा जाता है, लेकिन उनके पहुंचने पर संबंधित अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं रहते। इससे आवेदकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं और उन्हें मानसिक व आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सूत्रों का दावा है कि विभाग में विकास कार्यों से जुड़ी फाइलों के निपटारे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हैं। आरोप यह भी है कि निर्माण एवं विकास कार्यों में ठेकेदारों से भारी कमीशन लिया जाता है और फाइल पर हस्ताक्षर करने वाले विभिन्न स्तर के अधिकारियों के हिस्से तय रहते हैं। इस पूरे मामले में सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे, विभागीय कार्यकारी अभियंता से लेकर कनिष्ठ अभियंता स्तर तक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि यह पूरा तंत्र केवल एक-दो अधिकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग के उच्च स्तर तक फैला हुआ है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल आरटीआई कानून की भावना के विपरीत है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। एस के तिवारी का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है, लेकिन यदि अधिकारी जानबूझकर जानकारी देने में टालमटोल करें या आवेदकों को परेशान करें, तो यह कानून की मूल भावना के साथ खिलवाड़ है। अब जरूरत इस बात की है कि बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े, सहायक अभियंता पदमाकर चव्हाण के कार्यक्षेत्र में विकास निधि से कराए गए कार्यों व पेंडिंग आरटीआई की जांच कराएं। यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका या किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि बीएमसी के कामकाज में पारदर्शिता कायम हो और सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।

