
मुंबई। उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास ‘एंटीलिया’ के बाहर विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो मिलने और व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या से जुड़े बहुचर्चित मामले में करीब पांच वर्ष बाद महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति हुई है। मुंबई की विशेष एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालत ने शनिवार को पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा सहित सभी 10 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप (Charges) तय कर दिए हैं। इसके साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में नियमित ट्रायल का रास्ता साफ हो गया है। विशेष एनआईए न्यायाधीश चकोर बाविस्कर की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों को पेश किया गया। अदालत ने जब उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पढ़कर सुनाए तो सचिन वाझे, प्रदीप शर्मा और अन्य सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों से इनकार किया। आरोप स्वीकार नहीं किए जाने के बाद अदालत ने मामले को नियमित सुनवाई के लिए भेज दिया। अदालत ने एनआईए द्वारा लगाए गए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवादी साजिश, भारतीय दंड संहिता की हत्या (धारा 302), आपराधिक साजिश (धारा 120-बी), अपहरण (धारा 364), जबरन वसूली (धारा 384) तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं को बरकरार रखा है। मामले के 10 आरोपियों में से सचिन वाझे, पूर्व पुलिस अधिकारी सुनील माने और चार अन्य आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि प्रदीप शर्मा, रियाजुद्दीन काजी, विनायक शिंदे और नरेश गोर को सुप्रीम कोर्ट एवं बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है और वे फिलहाल जेल से बाहर हैं। अब एनआईए अदालत के समक्ष अपने गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करेगी। उल्लेखनीय है कि 25 फरवरी 2021 को दक्षिण मुंबई स्थित उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी एक स्कॉर्पियो कार बरामद हुई थी। कुछ दिनों बाद वाहन के मालिक मनसुख हिरेन का शव ठाणे की खाड़ी में मिला था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एनआईए को सौंपी गई थी, जिसने विस्तृत जांच के बाद पूर्व पुलिस अधिकारियों सहित 10 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। अब आरोप तय होने के बाद इस बहुचर्चित मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी, जिस पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं।





