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गणतंत्र दिवस पर इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित

शासन ने कमिश्नर को सौंपी जांच, शामली मुख्यालय से किए गए संबद्ध

बरेली/लखनऊ। गणतंत्र दिवस के दिन सनसनीखेज तरीके से इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को उत्तर प्रदेश शासन ने निलंबित कर दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने पूरे प्रकरण की जांच मंडलायुक्त (कमिश्नर) को सौंपी है। निलंबन अवधि के दौरान अलंकार अग्निहोत्री को शामली जिला मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) किया गया है। अब कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन यह तय करेगा कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाए या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए।
इस्तीफे के पीछे बताए दो बड़े कारण
2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पांच पन्नों के त्यागपत्र में कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इस्तीफे के पीछे मुख्य रूप से दो कारण गिनाए। पहला, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित मारपीट और उनके प्रति किए गए अपमान से स्वयं को आहत बताया। दूसरा, यूजीसी के नए कानून को लेकर असंतोष व्यक्त किया। उनके इस्तीफे ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है।
शंकराचार्य का समर्थन, ‘धर्म के क्षेत्र में बड़ा पद’ देने का आश्वासन
इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने देर रात अलंकार अग्निहोत्री से फोन पर बातचीत की। शंकराचार्य ने उनके कदम की सराहना करते हुए कहा कि पूरा सनातनी समाज उनसे प्रसन्न है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने उन्हें जो पद दिया था, उससे भी बड़ा पद उन्हें धर्म के क्षेत्र में दिया जाएगा। इस बयान के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।
डीएम आवास पर बंधक बनाए जाने का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया है कि उन्होंने इस्तीफे से पहले जिला अधिकारी अविनाश सिंह से उनके आवास पर मुलाकात की थी। बाहर निकलने के बाद उन्होंने दावा किया कि उन्हें करीब 45 मिनट तक वहां बंधक बनाकर रखा गया और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद ही उन्हें छोड़ा गया। इसके तुरंत बाद रात करीब 11 बजे उन्होंने अपना सरकारी आवास भी खाली कर दिया।
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री
अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से कानपुर के रहने वाले हैं और ब्राह्मण परिवार से आते हैं। उन्होंने वर्ष 2019 में 15वीं रैंक के साथ पीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इससे पहले भी वे अपने कार्यालय में भगवान बजरंग बली की तस्वीर लगाने को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चा में रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक गलियारों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या किसी लोक सेवक का धार्मिक भावनाओं के आधार पर इस्तीफा देना सेवा नियमावली का उल्लंघन माना जाएगा। फिलहाल शासन की निगाहें कमिश्नर की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिसके बाद अलंकार अग्निहोत्री के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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