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कृषि और पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए पाशा पटेल को ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड’

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की पर्यावरण-संतुलित विकास टास्क फोर्स के कार्यकारी अध्यक्ष और महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल को कृषि, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। 8 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 17वें एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉन्क्लेव-2026 में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। एग्रीकल्चर टुडे ग्रुप द्वारा केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस कॉन्क्लेव में भारत और विदेशों से नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, शोधकर्ता और कृषि एवं संबंधित क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं। पुरस्कार के प्रशस्ति-पत्र में किसानों को सशक्त बनाने के प्रति पाशा पटेल की प्रतिबद्धता, कृषि उत्पादों के लिए उचित मूल्य व्यवस्था की लगातार वकालत तथा टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए किए गए उनके नीति-आधारित प्रयासों की विशेष रूप से सराहना की गई। सम्मान प्राप्त करने के बाद पाशा पटेल ने बांस आधारित अर्थव्यवस्था और बायोफ्यूल उत्पादन को भारत के हरित और आत्मनिर्भर भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बांस आधारित जैव ईंधन देश के लिए सबसे बेहतर अवसरों में से एक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बांस तेजी से बढ़ने वाली और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ फसल है। इसके उत्पादन में पानी और खेती से जुड़े अन्य संसाधनों की अपेक्षाकृत कम आवश्यकता होती है। बांस का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के बायोफ्यूल के उत्पादन में किया जा सकता है, जो पारंपरिक जीवाश्म ईंधन का एक बेहतर विकल्प बन सकता है। पाशा पटेल ने कहा कि बांस आधारित बायोफ्यूल के उत्पादन को बढ़ावा देने से भारत की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही किसानों के लिए आय का एक नया और टिकाऊ स्रोत भी विकसित होगा। बांस के पर्यावरणीय महत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह फसल बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करती है और ऑक्सीजन छोड़ती है। इस कारण बांस जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक समाधान साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि बांस की जड़ों का विस्तृत तंत्र मिट्टी के कटाव को रोकने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खराब हो चुकी जमीन को दोबारा उपजाऊ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पाशा पटेल के अनुसार, देश में बांस आधारित मजबूत अर्थव्यवस्था विकसित करके एक साथ चार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है। इनमें पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और किसानों की आय में वृद्धि शामिल है। 17वें एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉन्क्लेव-2026 में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान, केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पी.सदाशिवम, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, एग्रीकल्चर टुडे ग्रुप के संस्थापक डॉ.एम.जे.खान सहित देश-विदेश के कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं। एग्रीकल्चर टुडे ग्रुप द्वारा वर्ष 2008 में शुरू किए गए ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड्स’ को भारत के कृषि क्षेत्र के प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है। पुरस्कार विजेताओं का चयन दो-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। इसमें विशेषज्ञ उप-समिति द्वारा मूल्यांकन के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली नेशनल अवार्ड्स कमेटी अंतिम निर्णय लेती है। इससे पहले ‘एग्रीकल्चर लीडरशिप अवार्ड’ से राजनाथ सिंह, शरद पवार, डॉ. एम.एस.स्वामीनाथन और डॉ.वर्गीज कुरियन जैसी प्रमुख हस्तियों को भी सम्मानित किया जा चुका है। 17वें एग्रीकल्चर लीडरशिप कॉन्क्लेव-2026 में पाशा पटेल को मिला यह सम्मान महाराष्ट्र के कृषि और पर्यावरण क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। साथ ही यह सम्मान देश में टिकाऊ खेती, स्वच्छ ऊर्जा, बांस आधारित अर्थव्यवस्था और जलवायु-अनुकूल ग्रामीण विकास के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित करता है।

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