
उन्नाव, उत्तर प्रदेश। जिलाधिकारी घनश्याम मीना ने नगर पालिका परिषद उन्नाव के देवारा कला स्थित 80 एमएलडी क्षमता वाले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण कर जल शोधन व्यवस्था का जायजा लिया। अमृत योजना के तहत संचालित इस प्लांट में उन्होंने पानी की गुणवत्ता, मशीनों की कार्यप्रणाली और आपूर्ति व्यवस्था की विस्तार से समीक्षा की।निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जल शोधन प्रक्रिया, मैनपावर, मशीनों की स्थिति तथा पानी के पीएच मान, आर्सेनिक, बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) और सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) सहित अन्य मानकों की जानकारी संबंधित अधिकारियों से प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि नगरवासियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।डीएम ने अधिकारियों को नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता जांच कराने, मशीनों का समय-समय पर रखरखाव सुनिश्चित करने तथा अनुभवी एजेंसी के माध्यम से आधुनिक तकनीक के साथ प्लांट संचालन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि जल शुद्धिकरण निर्धारित मानकों के अनुरूप होना चाहिए और नागरिकों तक नियमित रूप से साफ पेयजल पहुंचना चाहिए। इसके साथ ही पानी में मौजूद हैवी मैटर और माइक्रो केमिकल आर्सेनिक की घुलनशीलता की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा।बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में जलापूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए जिलाधिकारी ने प्लांट में क्षमता अनुसार जनरेटर की व्यवस्था करने और वर्षा ऋतु से पहले उच्च क्षमता वाले जनरेटर का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि नगरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। यदि जलापूर्ति या गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।इस अवसर पर नगर पालिका परिषद उन्नाव के अधिशासी अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और प्लांट कर्मचारी मौजूद रहे।




