
पालघर। महाराष्ट्र के पालघर जिले के विरार पूर्व स्थित शिरगांव इलाके में मंगलवार को अवैध खनन माफिया की कथित दबंगई का खौफनाक चेहरा सामने आया। अवैध पत्थर खदानों के खिलाफ पिछले 15 वर्षों से आवाज उठा रहे सामाजिक कार्यकर्ता आत्माराम पाटिल (54) की दिन-दहाड़े बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने पूरे पालघर जिले में सनसनी फैला दी है।
पंचनामा के दौरान हुआ हमला
जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे आत्माराम पाटिल स्थानीय सर्कल अधिकारी प्रभाकर के साथ विरार पूर्व के गडगापाड़ा गांव में अवैध पत्थर क्रशिंग और खनन गतिविधियों का पंचनामा करने पहुंचे थे। इसी दौरान कथित तौर पर अवैध खनिकों और उनके समर्थकों की भीड़ ने वहां पहुंचकर विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पहले सर्कल अधिकारी पर हमला किया, जिससे उनके कान के पास गंभीर चोटें आईं। इसके बाद भीड़ ने आत्माराम पाटिल को घेर लिया और लोहे की रॉड तथा पत्थरों से हमला कर दिया। हमले में उनका सिर बुरी तरह कुचल दिया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि घायल सर्कल अधिकारी किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से निकलने में सफल रहे, लेकिन आत्माराम पाटिल भीड़ के बीच फंस गए और हमलावरों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
खनन माफिया के खिलाफ लंबे समय से लड़ रहे थे
आत्माराम पाटिल इलाके में अवैध खनन और क्रशर मशीनों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे थे। उन्होंने पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की थी और न्यायालय में भी याचिका दायर की थी। परिवार का कहना है कि यह पहली बार नहीं था जब उन पर हमला हुआ हो। इससे पहले भी उन पर दो से तीन बार जानलेवा हमले हो चुके थे, लेकिन हर बार वह बच निकले थे।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक के बेटे हेमंत पाटिल ने खदान मालिक भालचंद्र पाटिल और उनके बेटे मयूर पाटिल पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। हेमंत पाटिल ने कहा, “मेरे पिता लंबे समय से जमीन और खनन माफिया के खिलाफ लड़ रहे थे। उन्होंने अवैध कारोबार के सामने झुकने से इनकार कर दिया था, इसलिए बदले की भावना से उनकी हत्या कर दी गई।”
इलाके में तनाव, जांच शुरू
घटना के बाद पूरे शिरगांव क्षेत्र में तनाव का माहौल है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। घायल सर्कल अधिकारी का इलाज जारी है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। स्थानीय पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एक बार फिर अवैध खनन माफिया के बढ़ते प्रभाव और सामाजिक कार्यकर्ताओं व सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




