
मुख्यमंत्री बोले—कर्जमाफी के साथ किसानों को कर्ज के दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए आधुनिक तकनीक जरूरी
नाशिक। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना के माध्यम से किसानों का कर्ज माफ किया गया है, लेकिन किसानों को हमेशा के लिए कर्ज के दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए आधुनिक तकनीक पर आधारित व्यवस्था तैयार करनी होगी। कृषि क्षेत्र की चुनौतियों को देखते हुए आधुनिकीकरण, नई तकनीक और अनुसंधान के जरिए उत्पादन लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने में कृषि महाविद्यालयों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री फडणवीस नाशिक जिले के दिंडोरी तालुका स्थित चाचडगांव में मराठा विद्या प्रसारक समाज संस्था के कर्मयोगी दुलाजी सीताराम पाटील कृषि महाविद्यालय की नई इमारत के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में जलसंसाधन मंत्री एवं नाशिक के पालकमंत्री गिरीश महाजन, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा ग्राहक संरक्षण मंत्री छगन भुजबल, स्कूली शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे, खाद्य एवं औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाल, सांसद डॉ. शोभा बच्छाव, राजाभाऊ वाजे, भास्कर भगरे और नाशिक की महापौर हिमगौरी आहेर-आडके सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद थे। फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में करीब 80 प्रतिशत किसान अल्पभूधारक हैं और उनकी निवेश क्षमता सीमित है। खेती की उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है और उसकी तुलना में न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए कृषि अनुसंधान को बढ़ावा देने के साथ उसे सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं के कारण यह कृषि महाविद्यालय भविष्य में नाशिक में कृषि अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बन सकता है। नाशिक की कृषि प्रगति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला कृषि क्षेत्र में अग्रणी है। यहां के किसान मेहनती हैं और आदिवासी क्षेत्रों में भी विभिन्न प्रकार की वनोपज तैयार की जाती है। देश से होने वाले अंगूर के कुल निर्यात में करीब 80 प्रतिशत हिस्सेदारी नाशिक जिले की है, जबकि नाशिक का प्याज पूरे देश में प्रसिद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाने के लिए तकनीक का उपयोग बेहद जरूरी है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की उत्पादक क्षमता प्रभावित हुई है। इसलिए राज्य सरकार कम उर्वरक इस्तेमाल कर अधिक उत्पादन प्राप्त करने वाली नई तकनीकों को प्रोत्साहित कर रही है। कृषि महाविद्यालयों को मिट्टी की प्रकृति के आधार पर किसानों को उर्वरकों के सही इस्तेमाल का मार्गदर्शन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि महाविद्यालयों के माध्यम से किसानों को मार्गदर्शन देने की व्यवस्था तैयार की जा रही है और विभिन्न फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। महाविद्यालयों की प्रयोगशालाओं में होने वाला अनुसंधान किसानों के खेतों तक पहुंचना चाहिए। किसान परिवारों के युवा कृषि शिक्षा हासिल कर खेती को खाद्य प्रसंस्करण और अन्य उद्योगों से जोड़ेंगे तो ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी अर्थव्यवस्था खड़ी की जा सकती है। फडणवीस ने कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत में 25 से 30 प्रतिशत तक कमी और उत्पादकता में करीब 40 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र ने कृषि क्षेत्र में AI के इस्तेमाल को बढ़ावा देते हुए ‘महाविस्तार ऐप’ तैयार किया है। इसके माध्यम से किसानों को पूरी फसल श्रृंखला से संबंधित मार्गदर्शन मिलेगा और वे विभिन्न भाषाओं में अपने सवालों के जवाब भी प्राप्त कर सकेंगे। इस अवसर पर पालकमंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। ऐसे में कृषि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से सक्षम बनाना आवश्यक है। कृषि महाविद्यालयों को ऐसे वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करने चाहिए, जो कृषि तथा उससे जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकें। समारोह में मुख्यमंत्री के हाथों ‘मविप्र पत्रिका’ के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। मराठा विद्या प्रसारक समाज संस्था की ओर से मुख्यमंत्री सहायता निधि के लिए 25 लाख रुपये का योगदान मुख्यमंत्री फडणवीस को सौंपा गया। उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों ने नए परिसर का निरीक्षण किया। परिसर में कृषि महाविद्यालय की मुख्य इमारत के साथ छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग छात्रावास सहित विभिन्न सुविधाएं विकसित की गई हैं।

