
भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की समस्याओं का दायरा व्यापक, कोर्ट ने कहा था- किसी छात्र की जान नहीं जानी चाहिए
मुंबई। महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों और छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं की कथित बदहाली को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। करीब 15 दिनों से भूख हड़ताल कर रहे आदिवासी छात्रों की समस्याओं से संबंधित याचिका को हाईकोर्ट ने सोमवार को जनहित याचिका (PIL) में बदल दिया। अदालत ने माना कि मामला केवल आंदोलनरत छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें राज्य के आदिवासी आश्रम स्कूलों और छात्रावासों से जुड़े व्यापक मुद्दे शामिल हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाद की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने राज्य सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक का विवरण अदालत के सामने रखा। इसके बाद पीठ ने आदिवासी आश्रम स्कूलों और छात्रावासों की स्थिति से जुड़ी व्यापक चिंताओं को देखते हुए मामले को PIL के रूप में सुनने का निर्णय लिया। इससे पहले पिछले सप्ताह हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की सुरक्षा और तत्काल चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि किसी भी छात्र की जान नहीं जानी चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया था कि आंदोलन स्थल पर डॉक्टर हर समय उपलब्ध रहें और आवश्यकता पड़ने पर छात्रों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाए। डॉक्टरों की सलाह पर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को भी कहा गया था। मामला उस समय अधिक गंभीर हो गया था, जब पुणे में आंदोलन कर रहे एक छात्र की तबीयत बिगड़ने की जानकारी अदालत के सामने आई। छात्र राज्य के आदिवासी आश्रम स्कूलों और छात्रावासों में बुनियादी ढांचे, भोजन, सुरक्षा और शैक्षणिक सुविधाओं में कथित कमियों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। आदिवासी छात्रों से जुड़ी कई गंभीर घटनाओं के बाद यह आंदोलन शुरू हुआ। इनमें गढ़चिरौली जिले के एक आवासीय आश्रम स्कूल में सांप के काटने से छात्रों की मौत की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इन घटनाओं के बाद आश्रम स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि छात्रों द्वारा उठाई गई समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आदिवासी विकास मंत्री और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच शनिवार को बैठक हुई थी, जिसमें छात्रों की मांगों और आश्रम स्कूलों से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई। अब बॉम्बे हाईकोर्ट इस मामले को जनहित याचिका के रूप में सुनते हुए आदिवासी छात्रों की समस्याओं के साथ राज्य में आश्रम स्कूलों और छात्रावासों की व्यवस्था, सुरक्षा, भोजन, बुनियादी ढांचे तथा शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़े व्यापक मुद्दों पर विचार करेगा।

