
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 40 लाख रुपये की जबरन वसूली के मामले में आरोपी धनराज शिंदे को गिरफ्तारी से पूर्व राहत देते हुए अग्रिम जमानत प्रदान की। यह आदेश अवकाशकालीन न्यायाधीश अश्विन भोबे ने पारित किया। शिंदे पर पुणे के देहू रोड पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के तहत मामला दर्ज है, जिसमें तीन व्यक्तियों पर एक ठेकेदार से 40 लाख रुपये की जबरन वसूली की साजिश का आरोप है। प्राथमिकी के अनुसार, 17 जनवरी 2024 को दर्ज मामले में आरोप है कि एक निर्माण परियोजना को लेकर कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर ठेकेदार से यह राशि मांगने की कोशिश की गई थी। इस साजिश के मुख्य आरोपी दो व्यक्तियों को 20 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था और 27 फरवरी को वडगांव (मावल) की मजिस्ट्रेट अदालत से उन्हें जमानत मिल गई थी। शिंदे के वकील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल की भूमिका केवल एक “संदेशवाहक” की थी, जो मुख्य आरोपी के निर्देश पर शिकायतकर्ता के पास गया था। उन्होंने यह भी कहा कि हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह पूरी जांच में सहयोग करेंगे और उनका कोई गंभीर आपराधिक इतिहास नहीं है। वहीं, अतिरिक्त सरकारी अभियोजक ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सीसीटीवी फुटेज में शिंदे की मौजूदगी दर्ज है और पहचान के लिए उसकी उपस्थिति जरूरी है। अभियोजन पक्ष ने यह भी दावा किया कि शिंदे का आपराधिक रिकॉर्ड है। न्यायमूर्ति भोबे ने अपने आदेश में कहा कि शिंदे के खिलाफ आरोप केवल संदेशवाहक की भूमिका तक सीमित हैं और मुख्य आरोपी पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोई वास्तविक जबरन वसूली नहीं हुई है, और शिंदे से कोई वसूली लंबित नहीं है। कोर्ट ने शिंदे को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत प्रदान की, साथ ही कुछ सख्त शर्तें भी लगाईं:- देहू रोड पुलिस स्टेशन में नियमित रिपोर्टिंग। बिना पूर्व अनुमति महाराष्ट्र से बाहर न जाना। सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित न करना। अदालत के आदेश के अनुसार, शिंदे को जांच में पूर्ण सहयोग देना होगा।




