
मुंबई। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि क्षयरोग (टीबी) केवल चिकित्सा से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि समाज के सामने एक आर्थिक और सामाजिक चुनौती भी है। आधुनिक चिकित्सा उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकता है। इसलिए समय पर जांच, नियमित उपचार और व्यापक जनजागरूकता के जरिए ‘टीबी मुक्त मुंबई’ और ‘टीबी मुक्त भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसे जनआंदोलन बनाना समय की जरूरत है। बुधवार को राज्यपाल मुंबई विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) और भामला फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में चेंबूर स्थित श्री नारायण गुरु महाविद्यालय में आयोजित ‘टीबी मुक्त मुंबई’ जनजागरूकता पदयात्रा को संबोधित कर रहे थे। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित अभियान में हजारों एनएसएस स्वयंसेवकों, विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। राज्यपाल ने कहा कि मुंबई और आसपास के करीब दो करोड़ नागरिकों तक टीबी के संबंध में सही जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं से शॉर्ट फिल्म, पोस्टर, पॉडकास्ट और डिजिटल माध्यमों के जरिए जागरूकता बढ़ाने तथा टीबी को मात दे चुके लोगों की प्रेरक कहानियां समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने फिल्म और टेलीविजन कलाकारों से भी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए अभियान को मजबूत करने की अपील की।
दो सप्ताह से ज्यादा खांसी हो तो कराएं जांच
राज्यपाल ने टीबी को लेकर समाज में मौजूद भ्रम और डर दूर करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी रहने पर तत्काल जांच करानी चाहिए। सरकार की ओर से टीबी का उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज का पूरा कोर्स करना आवश्यक है। उन्होंने टीबी मरीजों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करने और उनके प्रति सहानुभूति, सम्मान एवं सहयोग का व्यवहार रखने की अपील की। झुग्गी बस्तियों और संवेदनशील इलाकों में जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राकेश बेदी ने फिल्मी अंदाज में दिया संदेश
अभिनेता राकेश बेदी ने फिल्मी संवाद की शैली में टीबी के खिलाफ जागरूकता का संदेश देते हुए कहा कि टीबी से डरने की जरूरत नहीं है और मिलकर इसका मुकाबला किया जा सकता है। उनके अंदाज को मौजूद विद्यार्थियों ने तालियों के साथ सराहा। अभिनेता शिव ठाकरे ने कहा कि मुंबईकर हर संकट और बीमारी से लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। उन्होंने ‘टीबी मुक्त मुंबई’ अभियान से जुड़ने का अवसर मिलने पर भामला फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। राज्यपाल ने मुंबई विश्वविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवकों, बीएमसी टीबी सेल, स्वास्थ्य कर्मचारियों, भामला फाउंडेशन और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, स्वास्थ्य व्यवस्था, सामाजिक संस्थाओं, विद्यार्थियों, कलाकारों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से ‘टीबी मुक्त महाराष्ट्र’ और ‘टीबी मुक्त भारत’ का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। कार्यक्रम में मुंबई विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. रवींद्र कुलकर्णी, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, भामला फाउंडेशन के अध्यक्ष आसिफ भामला, प्रभारी प्राचार्य डॉ. जयश्री व्यंकटाचलम, एनएसएस के विशेष कार्य अधिकारी सुनील शिंदे सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक और हजारों एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित थे।

