Homeउत्तर प्रदेशभगवती चरण वर्मा की जयंती पर काव्य गोष्ठी, साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि

भगवती चरण वर्मा की जयंती पर काव्य गोष्ठी, साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। वरिष्ठ साहित्यकार एवं कथाकार भगवती चरण वर्मा की जयंती पर संस्कार भारती, उन्नाव की ओर से मोती नगर स्थित श्री सिद्ध रामभक्त हनुमान मंदिर के बाहरी परिसर में काव्य गोष्ठी एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साहित्यकारों, कवियों और प्रबुद्धजनों ने भगवती चरण वर्मा के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित साहित्यकारों और कवियों ने भगवती चरण वर्मा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर संस्कार भारती के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रभात सिन्हा ने भगवती चरण वर्मा को याद करते हुए कहा- मनुज-मन की गूढ़ कथा के, थे वे अनुपम चितेरे,
‘चित्रलेखा’ से अमर हुए, साहित्य-जगत के उजले सवेरे। डॉ. सिन्हा ने कहा कि भगवती चरण वर्मा ने अपने साहित्य के माध्यम से मानव मन की जटिलताओं, जीवन के द्वंद्व, नैतिकता-अनैतिकता और मनुष्य की आंतरिक संवेदनाओं को जिस सूक्ष्मता से अभिव्यक्त किया, उसने उन्हें हिंदी साहित्य में विशिष्ट स्थान दिलाया। उनका साहित्य आज भी पाठकों को जीवन और मनुष्य के विभिन्न पक्षों पर गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित करता है। काव्य गोष्ठी में युवा कवि मोहित वर्मा ने मां सरस्वती को समर्पित छंद प्रस्तुत करते हुए कहा- ज्ञान की प्रदायिनी हे मातु शारदे भवानी, जगमग ज्योति बन चित में समाइए।
बैरी आन-बान को लगा न पाए आग मातु, सैनिकों सा शौर्य मातु चित में जगाइए।”
उनकी प्रस्तुति को उपस्थित श्रोताओं ने सराहा। इसके बाद कवि राघवेंद्र बाजपेई ने राष्ट्र को समर्पित अपनी रचनाओं के माध्यम से देश के प्रति निष्ठा और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया। उन्होंने व्यवस्था की विसंगतियों पर व्यंग्य के माध्यम से प्रहार भी किया। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अध्यक्ष डॉ. विनय तिवारी एवं महामंत्री कमलेश कुमार श्रीवास्तव ने भगवती चरण वर्मा के जीवन, साहित्यिक व्यक्तित्व और रचनात्मक अवदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवती चरण वर्मा ने हिंदी साहित्य को ऐसी रचनाएं दीं, जिनमें समाज, व्यक्ति और मानवीय मनोविज्ञान के बीच गहरा अंतर्संबंध दिखाई देता है। डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि ‘चित्रलेखा’ के माध्यम से भगवती चरण वर्मा ने शब्दों को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि उन्हें मानव हृदय का दर्पण बना दिया। उनकी रचनाओं में मनुष्य के अंतर्द्वंद्व और जीवन के शाश्वत प्रश्न सहज रूप में उभरकर सामने आते हैं। कार्यक्रम में डॉ. श्रीकेश पाण्डेय, अखिलेश ओमर, प्रदीप निगम राघव और राजीव अवस्थी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए भगवती चरण वर्मा के साहित्यिक योगदान और हिंदी साहित्य में उनके स्थान को याद किया। इस अवसर पर संस्कार भारती के महामंत्री सियाराम पाण्डेय, कोषाध्यक्ष संजीव कुमार निगम, के.के. श्रीवास्तव, आशीष मिश्रा, शिशिर अस्थाना, अभिषेक शुक्ल, चंद्रभूषण सिंह और संतोष बाथम सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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