
मुंबई। एमएमआरडीए ने स्पष्ट किया है कि संबंधित इमारत वर्ष 2005 में एचडीआईएल (Housing Development & Infrastructure Ltd.) द्वारा स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) की झुग्गी पुनर्वास योजना के तहत बनाई गई थी। ग्राउंड प्लस 16 मंजिला इस आरसीसी इमारत में छह विंग और करीब 500 आवासीय फ्लैट हैं, लेकिन परियोजना अधूरी रह जाने के कारण इसे कभी भी नियमित रूप से रहने के लिए शुरू नहीं किया गया। बाद में डेवलपर के दिवालिया होने के बाद यह अधूरी इमारत “जैसी है, जहां है” के आधार पर एमएमआरडीए को हस्तांतरित कर दी गई। एमएमआरडीए के अनुसार, इमारत की उम्र और अधूरी स्थिति को देखते हुए वर्ष 2021 में इसका स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया गया था। ऑडिट रिपोर्ट में भवन को रहने के लिए असुरक्षित बताया गया और सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कार्रवाई करने की सिफारिश की गई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर एमएमआरडीए ने भवन को गिराने की प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया शुरू की। निविदा प्रक्रिया के बाद ध्वस्तीकरण का काम टोटल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली को सौंपा गया था। अनुबंध के अनुसार इमारत को मैनुअल (हाथ से) तरीके से गिराया जाना था। घटना के बाद एमएमआरडीए ने प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। घायलों के इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनके चिकित्सा खर्च और आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा घटना में क्षतिग्रस्त झोपड़ियों और वाहनों की मरम्मत अथवा नुकसान की भरपाई का खर्च भी संबंधित ठेकेदार से वहन कराया जाएगा। एमएमआरडीए ने अनुबंध की शर्तों और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही संबंधित जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एमएमआरडीए ने कहा है कि सार्वजनिक सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित लोगों को उचित सहायता और मुआवजा दिलाने के साथ-साथ कार्य निष्पादन में हुई किसी भी लापरवाही के लिए जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय की जाएगी।

