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बाल अधिकार आयोग ने की समीक्षा बैठक: बच्चों के लिए सुरक्षित और बाल-हितैषी माहौल बनाने पर दिया जोर

मुंबई। महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने राज्य की आश्रमशालाओं, आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और बाल-हितैषी वातावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विभिन्न व्यवस्थाओं की समीक्षा की। आयोग के कार्यालय में आयोजित बैठक में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, स्वच्छता, भोजन-पानी, बाल अधिकारों की रक्षा तथा संबंधित विभागों के बीच समन्वय जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में आयोग के अध्यक्ष एडवोकेट संजय पुराणिक, सदस्य गीतांजलि बुटी, शुभांगी तांबट, संजय लाखेपाटील, अतुल देसाई, प्रविण भुजाडे, मिलन जंगम तथा आयोग की सचिव वंदना जैन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में कहा गया कि आवासीय संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी, अधीक्षक, शिक्षक और अन्य कर्मचारियों को 24 घंटे संवेदनशील और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित समीक्षा भी आवश्यक है। आयोग ने आश्रमशालाओं और आवासीय संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं का बच्चों को वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी जांच के लिए चाइल्ड सेफ्टी ऑडिट और प्रभावी निगरानी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। इसमें पेयजल, भोजन की गुणवत्ता, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सीसीटीवी व्यवस्था, कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन, शिकायत निवारण तंत्र और विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया को शामिल करने का सुझाव दिया गया। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि आवासीय संस्थानों में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की नियमित निगरानी की जाए, रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए और बच्चों के सीधे संपर्क में आने वाले स्थायी, संविदा एवं अन्य सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से पूरा हो। बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए दूषित भोजन और पानी से बचाव, पानी की नियमित जांच, टंकियों की सफाई, भोजन की गुणवत्ता, रसोई की स्वच्छता, खाद्य सामग्री के सुरक्षित संचालन, नियमित स्वास्थ्य जांच तथा आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया गया। किशोरियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन, सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता, उनके सुरक्षित निस्तारण, नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा हुई। पारधी, कातकरी तथा अन्य वंचित एवं प्रवासी समुदायों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने, जन्म प्रमाणपत्र, आधार और अन्य आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तर पर विभिन्न विभागों के समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए गए। आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि आश्रमशालाओं और आवासीय संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थियों की प्रेरक कहानियों को समाज के सामने लाया जाए। बैठक में निर्णय लिया गया कि आश्रमशालाओं और आवासीय संस्थानों की सुविधाओं तथा बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने के लिए महाराष्ट्र राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से राज्यस्तरीय जांच समिति गठित की जाएगी। यह समिति संबंधित विभागों के समन्वय से विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।

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