
मुंबई। देश में वर्तमान में 176 समुद्री प्रशिक्षण संस्थान और 533 से अधिक मान्यता प्राप्त भर्ती एवं नियुक्ति एजेंसियां कार्यरत हैं। इन संस्थानों को महाराष्ट्र के विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए, ताकि स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए रोजगार एवं करियर के नए अवसर उपलब्ध हो सकें। यह बात महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने लोकभवन, मुंबई में आयोजित 63वें राष्ट्रीय समुद्री दिवस समारोह के उद्घाटन अवसर पर कही। गुरुवार को राष्ट्रीय समुद्री दिवस समारोह की केंद्रीय समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि भारत के आर्थिक विकास में समुद्री क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश को वैश्विक समुद्री महाशक्ति बनाने के लिए कौशल विकास, आधुनिक तकनीक, समुद्री सुरक्षा तथा नाविकों के कल्याण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत के पास 11 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा, मजबूत बंदरगाह व्यवस्था और तेजी से विकसित हो रही समुद्री आधारभूत संरचना है। देश के पंजीकृत बेड़े में वर्तमान में 1,617 जहाज हैं, जिनकी कुल ग्रॉस टनेज 14.41 मिलियन से अधिक है। वहीं, लगभग 3.23 लाख सक्रिय भारतीय नाविक विश्वभर के समुद्री मार्गों पर कार्यरत हैं, जिनमें 7,033 महिला नाविक भी शामिल हैं। राज्यपाल ने कहा कि समुद्री क्षेत्र की प्रगति में नाविकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी सुरक्षा, कल्याण तथा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने Merchant Shipping Act, 2025 और Coastal Shipping Act, 2025 को भारत के समुद्री क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार इन कानूनों से समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी, तटीय जल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा, संपर्क व्यवस्था बेहतर होगी और समुद्री क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। राज्यपाल ने कहा कि मुंबई भारतीय जहाजरानी का ऐतिहासिक प्रवेशद्वार रहा है और आज भी यह समुद्री प्रशासन, व्यापार और विशेषज्ञता का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। उन्होंने समुद्री शिक्षा और ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में भी व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में निवेश और नवाचार से देश को बड़ा लाभ मिल सकता है। उन्होंने कहा– यदि विकसित भारत का सपना साकार करना है, तो विकसित समुद्री क्षेत्र का निर्माण अनिवार्य है। विकसित समुद्री क्षेत्र के बिना विकसित भारत की संकल्पना अधूरी रहेगी। इस अवसर पर समुद्री प्रशासन के महानिदेशक एवं राष्ट्रीय समुद्री दिवस समारोह की केंद्रीय समिति के अध्यक्ष श्याम जगन्नाथन, अतिरिक्त महानिदेशक सुनील खोपड़े, उपमहानिदेशक प्रवीण पाटील, उपमहानिदेशक डॉ. सुधीर कोहकड़े, केंद्रीय समिति के सदस्य, सीफेयर्स संगठनों के प्रतिनिधि तथा समुद्री क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे।

