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शाहिद माल्या ने ‘एक शाम कृष्ण कुमार के नाम’ सीज़न-2 के जरिए पिता को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

मुंबई। मशहूर प्लेबैक सिंगर शाहिद माल्या ने अपने पिता और संगीत गुरु कृष्ण कुमार माल्या की स्मृति को समर्पित विशेष संगीत संध्या ‘एक शाम कृष्ण कुमार के नाम – ए ट्रिब्यूट ऑफ़ लव टू माई फादर, ए लिगेसी दैट लिव्स ऑन’ के दूसरे सीज़न का आयोजन किया। यह कार्यक्रम संगीत, भावनाओं, यादों और पिता-पुत्र के अटूट रिश्ते को समर्पित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि बनकर सामने आया।शाम के दौरान शाहिद माल्या ने अपने पिता की यादों को साझा करते हुए कई सदाबहार गीत प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि संगीत की उनकी पूरी यात्रा की नींव उनके पिता ने ही रखी थी। शास्त्रीय और भक्ति संगीत के वातावरण में पले-बढ़े शाहिद ने कृष्ण कुमार माल्या से सुर, लय, अभिव्यक्ति और मंच प्रस्तुति की बारीकियां सीखीं, जिसने उन्हें भारतीय फिल्म संगीत की चर्चित आवाज़ों में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त किया।इस विशेष संध्या में सुदेश भोसले, मधुश्री, कुमार, सौम्या टंडन, अबू मलिक, देव नेगी, नासिर खान, सुप्रिया पाठक, स्नेहा शंकर, राम शंकर, अरविंदर सिंह, प्रशांत वीरेंद्र शर्मा, अभिनंदन सिंह, सावेरी वर्मा, संजय टंडन, राजा सागू, रश्मि आर्या, सिद्धार्थ सिब्बल सहित कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान संगीत के साथ-साथ शाहिद ने अपने पिता से जुड़ी कई भावुक यादें भी साझा कीं। प्रत्येक प्रस्तुति में उनके पिता द्वारा दिए गए संस्कार, अनुशासन और संगीत के प्रति समर्पण की झलक दिखाई दी। पहले सीज़न को मिली शानदार सफलता के बाद आयोजित दूसरे संस्करण ने भी अपनी आत्मीय प्रस्तुति, भावनात्मक कहानी और मधुर संगीत से दर्शकों का दिल जीत लिया।कार्यक्रम के बाद शाहिद माल्या ने कहा, “यह शाम मेरी जिंदगी के सबसे खास पलों में से एक रहेगी। यह केवल गीत प्रस्तुत करने का मंच नहीं था, बल्कि मेरे पिता, मेरे पहले गुरु और उस इंसान को श्रद्धांजलि देने का अवसर था जिसने मुझे मेरी पहचान दी। संगीत के माध्यम से लोगों को उनकी विरासत से जुड़ते देखना मेरे लिए बेहद भावुक अनुभव रहा। मैं उन सभी का आभारी हूं जिन्होंने इस यात्रा का हिस्सा बनकर मेरे पिता की स्मृति को सम्मान दिया। उनका आशीर्वाद हमेशा मेरा मार्गदर्शन करता रहेगा।”कार्यक्रम का समापन दर्शकों की जोरदार तालियों और स्टैंडिंग ओवेशन के साथ हुआ। यह संगीतमय शाम इस बात का सशक्त संदेश देकर समाप्त हुई कि कलाकार भले ही मंच से विदा हो जाए, लेकिन उसकी कला, सीख और विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहती है।

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