
मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने प्रभादेवी स्थित प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर के दान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मनसे की छात्र शाखा के 20वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि मंदिर के दान पात्रों से हर वर्ष लगभग ₹18 करोड़ की कथित हेराफेरी हो रही है। राज ठाकरे ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के 11 में से 8 ट्रस्टियों ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर मंदिर के दान में कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की है। अपने संबोधन में उन्होंने ट्रस्टियों के पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि आस्था के केंद्र भी अब भ्रष्टाचार से अछूते नहीं रहे हैं और भक्तों की श्रद्धा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवादों से जोड़ते हुए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठाए तथा आरोप लगाया कि इतने गंभीर मामलों पर चुप्पी साधी गई है। राज ठाकरे ने दावा किया कि ट्रस्टियों के पत्र में मंदिर के कुछ कर्मचारियों को दान की राशि के कथित गबन के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। उनका कहना था कि संबंधित कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद मंदिर में मिलने वाले दान की राशि में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे अनियमितताओं की आशंका और मजबूत होती है। वहीं, मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी राहुल लोंधे ने बताया कि आंतरिक समीक्षा के दौरान कुछ कर्मचारियों की कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद ट्रस्टियों ने पूर्व में वित्तीय ऑडिट की मांग की थी। उन्होंने कहा कि नौ कर्मचारियों को निगरानी में रखने के बाद दान राशि के कथित गबन के आरोप में कार्रवाई की गई। उनके अनुसार, कार्रवाई के बाद साप्ताहिक दान, जो पहले लगभग ₹50 लाख रहता था, बढ़कर ₹75 लाख तक पहुंच गया और कई बार ₹95 लाख तक भी दर्ज किया गया। दूसरी ओर, सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने राज ठाकरे के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्टियों के पत्र में ₹18 करोड़ के किसी घोटाले का आरोप नहीं लगाया गया था, बल्कि केवल कुछ कर्मचारियों के कथित कदाचार और दान राशि के गबन की शिकायत का उल्लेख था। उन्होंने बताया कि संबंधित नौ कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा चुकी है तथा दर्शन के नाम पर अवैध वसूली करने वालों पर भी कार्रवाई की गई है। सरवणकर ने दावा किया कि पिछले दो वर्षों में बेहतर प्रबंधन, कड़ी निगरानी और पारदर्शिता बढ़ने से मंदिर के दान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। फिलहाल, मंदिर के दान और कथित अनियमितताओं को लेकर लगाए गए आरोपों तथा ट्रस्ट की सफाई के बाद यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

