
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एकीकृत राहत योजना तैयार करने के दिए निर्देश, वसई-विरार में बनेंगे ‘होल्डिंग स्पॉट’, क्षतिग्रस्त सड़क और बुनियादी ढांचे की मरम्मत युद्धस्तर पर करने के आदेश
मुंबई। पालघर और नाशिक जिलों में अतिवृष्टि और बाढ़ से प्रभावित परिवारों को मौजूदा नियमों में निर्धारित सहायता से अधिक मदद देने के लिए महाराष्ट्र सरकार विशेष पैकेज तैयार करेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोनों जिलों के लिए एकीकृत राहत योजना तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रभावित नागरिकों को तत्काल सहायता देने के साथ भविष्य में ऐसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए स्थायी बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए। मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में पालघर जिले में अतिवृष्टि से हुए नुकसान और राहत-पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पालघर अधिक वर्षा वाला और तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ता जिला है। इसलिए भविष्य की संभावित आपदाओं को ध्यान में रखकर अभी से दीर्घकालीन उपाय करना जरूरी है।
4197 प्रभावित परिवारों को दी गई सहायता
बैठक में बताया गया कि पालघर, डहाणू और तलासरी तालुका के करीब 4,197 प्रभावित परिवारों को खाद्यान्न और आर्थिक सहायता वितरित की गई है। सूर्या नदी, कवडसा और सूर्या बांध क्षेत्र में अतिवृष्टि के बाद जमा पानी की निकासी में 48 घंटे से अधिक समय लगने की जानकारी भी बैठक में दी गई। लंबे समय तक घरों में पानी भरा रहने से बड़ी संख्या में परिवारों को नुकसान हुआ। ऐसे परिवारों के नुकसान का पंचनामा तेजी से पूरा करने, सहायता उपलब्ध कराने और जरूरत के अनुसार पुनर्वास के लिए आवास उपलब्ध कराने पर चर्चा हुई।
वसई-विरार में बनाए जाएंगे ‘होल्डिंग स्पॉट’
मुख्यमंत्री ने वसई-विरार की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अतिवृष्टि के दौरान जमा होने वाले पानी के अस्थायी भंडारण के लिए ‘होल्डिंग स्पॉट’ और होल्डिंग पॉन्ड्स विकसित करने के निर्देश दिए। इसके लिए लीज अवधि समाप्त हो चुकी जमीनों के इस्तेमाल की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया है। वसई लिंक और नालासोपारा सहित उन इलाकों में भी स्थायी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया, जहां भारी बारिश और बाढ़ के दौरान संपर्क टूटने की स्थिति पैदा होती है।
सड़क और बिजली व्यवस्था को आपदा के अनुरूप बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक बांधकाम विभाग, ग्राम विकास विभाग और संबंधित एजेंसियों को क्षतिग्रस्त सड़कों की पहचान कर युद्धस्तर पर उनकी मरम्मत करने के निर्देश दिए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और जनजीवन जल्द सामान्य हो सके। ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनियों को भी बिजली वितरण ढांचे का पुनर्गठन एवं उन्नयन करने को कहा गया है, ताकि भविष्य में बाढ़ या अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों के दौरान भी बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और निर्बाध रखा जा सके।
पालघर का होगा मैपिंग, तैयार किया जाएगा बेस मैप
मुख्यमंत्री ने जलाशयों, प्राकृतिक जलप्रवाहों और पूरे भूभाग का विस्तृत अध्ययन कर बेस मैप तैयार करने के निर्देश दिए। इसका उपयोग भविष्य की विकास योजनाओं, जल निकासी व्यवस्था और निर्माण संबंधी अनुमतियों में किया जाएगा। रायगढ़ और रत्नागिरी की तर्ज पर महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (मित्रा) के माध्यम से महाराष्ट्र रिस्पॉन्सिव डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत पालघर के लिए भी योजना तैयार करने को कहा गया है। इससे जिले के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ विश्व बैंक से वित्तीय सहायता प्राप्त करने में भी मदद मिलने की बात कही गई।
₹584.45 करोड़ के प्रस्ताव पर चर्चा
बैठक में बाढ़ से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए ₹584.45 करोड़ के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण और मरम्मत, सुरक्षा बांध, जलशुद्धीकरण परियोजना को हुए नुकसान की भरपाई, पुलों और मोरियों की ऊंचाई बढ़ाने तथा खुले नालों के निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को इन कार्यों में तेजी लाने और तत्काल कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एकीकृत राहत योजना को शीघ्र मंजूरी दी जाएगी। कोल्हापुर में आई बाढ़ के दौरान जिस तरह विशेष सहायता उपलब्ध कराई गई थी, उसी प्रकार पालघर और नाशिक के प्रभावितों को भी नियमों में निर्धारित सहायता से अधिक मदद देने की दिशा में विशेष पैकेज तैयार किया जाएगा। इसके लिए तात्कालिक और दीर्घकालीन उपायों के प्रस्ताव जल्द शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

