Homeउत्तर प्रदेशपर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बना रहे ‘हरित प्रहरी’ अनूप मिश्रा, दो लाख...

पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बना रहे ‘हरित प्रहरी’ अनूप मिश्रा, दो लाख से अधिक पौधों का करा चुके रोपण

गांव-गांव बांट रहे पीपल, बरगद और नीम के पौधे; 5 लाख से अधिक लोगों को दिलाया प्रकृति संरक्षण का संकल्प

उन्नाव, उत्तर प्रदेश। भीषण गर्मी, लगातार बढ़ते तापमान, गिरते भूजल स्तर और प्रदूषण की चुनौती के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस में सीनियर सब इंस्पेक्टर एवं उन्नाव पुलिस कंट्रोल रूम प्रभारी अनूप कुमार मिश्रा पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को जनआंदोलन का रूप देने में जुटे हैं। ‘पेड़ वाले पुलिस अंकल’, ‘ट्री मैन ऑफ यूपी’ और ‘ऑक्सीजन मैन ऑफ यूपी’ के नाम से प्रसिद्ध अनूप मिश्रा गांवों से लेकर शहर के मोहल्लों तक पहुंचकर पीपल, बरगद और नीम जैसे छायादार पौधे वितरित कर लोगों को पौधरोपण के साथ उनकी सुरक्षा का संकल्प दिला रहे हैं। अनूप मिश्रा लोगों को समझाते हैं कि आज लगाया गया पौधा आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा और स्थायी ‘प्राकृतिक एसी’ साबित होगा। उनका मानना है कि बढ़ते तापमान, घटते भूजल स्तर और प्रदूषण जैसी समस्याओं का प्रभावी समाधान अधिक से अधिक पौधरोपण और लगाए गए पौधों का संरक्षण है। इसी सोच के साथ उन्होंने लोगों को एयर कंडीशनर जैसे उपहारों के बजाय पीपल, बरगद और अन्य पौधे भेंट करने की अनूठी पहल शुरू की है।
पौधरोपण के साथ जियो टैगिंग पर जोर
अनूप मिश्रा ने केवल पौधे लगाने तक अपनी मुहिम सीमित नहीं रखी, बल्कि पौधों की जियो टैगिंग की पहल भी शुरू की है। इसके माध्यम से लगाए गए पौधों की स्थिति और उनके विकास की निगरानी की जा सकेगी। वे लोगों को भी जियो टैगिंग के साथ पौधरोपण के लिए प्रेरित कर रहे हैं, ताकि पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके। उनके अनुसार, पौधरोपण अभियान की वास्तविक सफलता केवल पौधों की संख्या में नहीं, बल्कि इस बात में है कि लगाए गए कितने पौधे सुरक्षित रहकर बड़े वृक्ष का रूप लेते हैं।
दो लाख से अधिक पौधों का रोपण, 20 हजार ट्री गार्ड की व्यवस्था
अनूप मिश्रा के प्रयासों से वन विभाग, विभिन्न सरकारी विभागों, स्कूल-कॉलेजों, सामाजिक संस्थाओं और जनसहयोग के माध्यम से 20 हजार से अधिक पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड की व्यवस्था कराई जा चुकी है। उनके मुताबिक स्वयं के प्रयासों और जनसहयोग से अब तक दो लाख से अधिक पौधों का रोपण कराया गया है और बड़ी संख्या में पौधों की देखभाल कर उन्हें वृक्ष के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया है। पर्यावरण संरक्षण को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल-कॉलेजों और मोहल्लों में ‘पर्यावरण संरक्षण पाठशाला’, ‘इको क्लास’ और ‘प्रकृति संवाद’ जैसे एक हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। अभियान के तहत तीन हजार से अधिक स्कूलों को जोड़कर उन्हें मॉडल ग्रीन स्कूल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए गए हैं। अनूप मिश्रा का दावा है कि शहरों, गांवों, स्कूलों और मोहल्लों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से पांच लाख से अधिक लोगों को पर्यावरण एवं प्रकृति संरक्षण का संकल्प दिलाया जा चुका है।
‘बरगद बचाओ महाअभियान’ से जुड़ीं हजारों महिलाएं
राष्ट्रीय वृक्ष बरगद की संख्या बढ़ाने और पुराने बरगद के वृक्षों के संरक्षण के उद्देश्य से अनूप मिश्रा ने ‘बरगद बचाओ महाअभियान—मैं हूं मित्र बरगद का’ शुरू किया है। इस अभियान को वट सावित्री व्रत से जोड़कर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया गया है। अभियान से हजारों महिलाओं के जुड़ने और सक्रिय सहयोग मिलने की बात कही गई है। इसके साथ ही बरगद को ‘विरासत वृक्ष’ का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है। अभियान के माध्यम से लोगों को पुराने और विशाल वृक्षों की पर्यावरणीय तथा सांस्कृतिक उपयोगिता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
अब गांवों में लगेगी ‘वृक्ष जल कथा–पर्यावरण चौपाल’
ग्रीन भारत अभियान के संयोजक अनूप मिश्रा अपूर्व अब पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को गांव की चौपालों से शहर के मोहल्लों तक और व्यापक बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके तहत ‘वृक्ष जल कथा–पर्यावरण चौपाल’ आयोजित की जाएगी। इन चौपालों में लोगों को बरगद, पीपल, नीम, आंवला और तुलसी जैसे पेड़-पौधों के साथ गंगा, यमुना, नर्मदा जैसी नदियों से जुड़ी लोककथाओं के माध्यम से प्रकृति का महत्व समझाया जाएगा। साथ ही नदी, पोखर, तालाब और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण की आवश्यकता बताते हुए लोगों को इनकी रक्षा का संकल्प दिलाया जाएगा। स्कूल और कॉलेजों में शिक्षकों तथा छात्र-छात्राओं को शामिल कर ‘ग्रीन टास्क फोर्स’ बनाने की भी योजना है। यह टीम ‘ग्रीन कैंपस, क्लीन कैंपस’ की दिशा में कार्य करेगी। पौधरोपण के साथ जियो टैगिंग और ‘सेल्फी विद पौधा’ अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि विशेष रूप से युवाओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जा सके।
‘प्रकृति से आत्मिक संबंध बनाना होगा’
अनूप मिश्रा अपूर्व ने कहा, “पेड़-पौधे और नदियां केवल प्राकृतिक संपदा नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति में जीवन, आस्था और अध्यात्म का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन्हें पूजनीय मानकर हमारी परंपरा हमें पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देती है। प्रकृति के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को समझते हुए हमें पेड़-पौधों, नदियों और जलस्रोतों के साथ आत्मिक संबंध बनाकर उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभानी होगी। खाकी वर्दी में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ अनूप मिश्रा की यह हरित मुहिम पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी बढ़ाने का प्रयास कर रही है। उनका लक्ष्य पौधे लगाने के साथ लोगों में ऐसी जिम्मेदारी विकसित करना है, जिससे लगाए गए पौधों की रक्षा हो, पुराने वृक्ष सुरक्षित रहें और आने वाली पीढ़ियों को अधिक हरा-भरा एवं स्वच्छ वातावरण मिल सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments