
मुंबई। महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने केंद्र सरकार की समग्र शिक्षा योजना के तहत महाराष्ट्र को मिलने वाले बजट को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि देश के कुल विद्यार्थियों में 8.61 प्रतिशत छात्र महाराष्ट्र में पढ़ते हैं, जबकि समग्र शिक्षा योजना के कुल बजट में राज्य को केवल 3.06 प्रतिशत हिस्सा मिल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से महाराष्ट्र के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि करने की मांग की। गुरुवार को दादाजी भुसे नई दिल्ली में आयोजित केंद्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा के लिए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों की दो दिवसीय परिषद को संबोधित कर रहे थे।
एक लाख से अधिक स्कूल और 2.10 करोड़ छात्रों का राज्य
शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 में समग्र शिक्षा योजना का कुल राष्ट्रीय बजट 87,367 करोड़ रुपये है, जबकि महाराष्ट्र को केवल 2,673 करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में एक लाख से अधिक स्कूल, 7.5 लाख से ज्यादा शिक्षक और 2.10 करोड़ से अधिक विद्यार्थी हैं। मुंबई और पुणे जैसे महानगरों से लेकर गडचिरोली और नंदुरबार जैसे दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक फैले महाराष्ट्र की भौगोलिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखते हुए बजट आवंटन किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि राज्य के 88 हजार करोड़ रुपये के शिक्षा बजट का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा शिक्षकों के वेतन और पेंशन पर खर्च हो जाता है। ऐसे में विद्यालयों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए केंद्र सरकार से अधिक वित्तीय सहायता आवश्यक है।
अनुदानित स्कूलों को भी मिले समग्र शिक्षा योजना का लाभ
दादाजी भुसे ने कहा कि महाराष्ट्र के कुल स्कूलों में अनुदानित विद्यालयों की संख्या केवल 25 प्रतिशत है, लेकिन राज्य के करीब 50 प्रतिशत विद्यार्थी इन्हीं स्कूलों में पढ़ते हैं। राज्य सरकार इन विद्यालयों के शिक्षकों का वेतन और पेंशन पूरी तरह वहन करती है, जबकि केंद्र सरकार की ओर से केवल पाठ्यपुस्तकों जैसी सीमित सहायता मिलती है। उन्होंने मांग की कि समग्र शिक्षा योजना के तहत कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और भवन निर्माण जैसे बुनियादी ढांचे के लिए मिलने वाला अनुदान केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित न रहे, बल्कि अनुदानित विद्यालयों को भी इसका लाभ दिया जाए।
ग्रामीण छात्रों को परिवहन भत्ता देने की मांग
शिक्षा मंत्री ने पीएम श्री, आदर्श और क्लस्टर स्कूलों में पढ़ने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए भी परिवहन भत्ता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह सुविधा केवल उन छात्रों तक सीमित है, जिनके आसपास कोई स्कूल उपलब्ध नहीं है। यदि इन उत्कृष्ट विद्यालयों में अध्ययनरत सभी ग्रामीण विद्यार्थियों को परिवहन सहायता मिलेगी तो ये संस्थान वास्तविक क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र बन सकेंगे।
मिड-डे मील योजना के रसोइयों का मानदेय बढ़ाने की मांग
दादाजी भुसे ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों और सहायकों के मानदेय में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 600 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये प्रति माह करने की मांग भी दोहराई। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में इस योजना के तहत लगभग 1 लाख 64 हजार 558 रसोइये एवं सहायक कार्यरत हैं। उन्हें प्रति माह 2,500 रुपये मानदेय दिया जाता है, जिसमें केंद्र सरकार का योगदान केवल 600 रुपये, जबकि राज्य सरकार 1,900 रुपये देती है। इस पर राज्य सरकार हर वर्ष करीब 411.38 करोड़ रुपये खर्च करती है।शिवाजी महाराज के इतिहास को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जताया आभार
बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास को पाठ्यक्रम में व्यापक रूप से शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे नई पीढ़ी को छत्रपति शिवाजी महाराज के त्याग, पराक्रम और दूरदर्शी नेतृत्व से प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी आभार व्यक्त किया।





