
मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘वन नेशन, वन एप्लीकेशन’ अवधारणा के अनुरूप महाराष्ट्र विधानमंडल में नेवा (नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन – NEVA) प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष एड. राहुल नार्वेकर तथा संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटील की पूर्व बैठक में लिए गए निर्णय के बाद विधान भवन, मुंबई में इस परियोजना पर महत्वपूर्ण प्रस्तुति और समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में नेवा प्रणाली की कार्यप्रणाली, लाभ, तकनीकी पहलुओं, जिम्मेदारियों और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री की अंतिम स्वीकृति के बाद इस परियोजना के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच जल्द ही एमओयू (सामंजस्य समझौते) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। नेवा भारत सरकार के संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा विकसित एक एकीकृत डिजिटल प्रणाली है, जिसका उद्देश्य विधानमंडलों के कामकाज का आधुनिकीकरण, दक्ष प्रबंधन और पेपरलेस विधानसभा की व्यवस्था स्थापित करना है। देश के अधिकांश राज्यों में यह प्रणाली पहले से लागू है और महाराष्ट्र में इसे अगले तीन महीनों के भीतर पूरी क्षमता के साथ शुरू करने की योजना है। इस परियोजना पर 80 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसका वहन केंद्र और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में करेंगे। यह निधि मुंबई और नागपुर स्थित महाराष्ट्र विधानसभा तथा विधान परिषद में नेवा प्रणाली लागू करने पर खर्च की जाएगी।
नेवा प्रणाली लागू होने के बाद महाराष्ट्र विधानमंडल राष्ट्रीय डिजिटल विधायी नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इससे विधायकों को लोकसभा, राज्यसभा और देश के विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं एवं विधान परिषदों की कार्यवाही, प्रश्नोत्तर, विधेयक, समिति रिपोर्ट, नियम और अन्य संसदीय दस्तावेज एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध होंगे। इससे विधायी कार्यों में पारदर्शिता, सूचना का तेज आदान-प्रदान और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि नेवा परियोजना महाराष्ट्र विधानमंडल के डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी और आधुनिक, पारदर्शी तथा तकनीक आधारित विधायी व्यवस्था को मजबूत करेगी।

