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महाराष्ट्र सरकार पुनर्वास नीति में करेगी बड़े बदलाव, परियोजना प्रभावितों के हित होंगे सर्वोपरि

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में नई नीति तैयार करेगी। बुधवार को राहत एवं पुनर्वास राज्यमंत्री एड. आशीष जयसवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुनर्वास नीति में आवश्यक सुधारों का मसौदा तैयार किया जाए और इसमें परियोजना प्रभावित परिवारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में पुनर्वास कानून, वैकल्पिक भूमि आवंटन, लैंड बैंक, गांवठाण भूखंड उपलब्धता तथा परियोजना प्रभावितों को रोजगार या विकसित भूखंड देने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। राज्यमंत्री जयसवाल ने कहा कि राज्य में विभिन्न सार्वजनिक परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए पुनर्वास नीति में व्यापक सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि वैकल्पिक भूमि आवंटन के लिए जिला स्तर पर लैंड बैंक को अधिक मजबूत बनाया जाए तथा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम-2013 के तहत प्रभावित परिवारों को एकमुश्त मुआवजे के बजाय रोजगार या विकसित भूखंड का विकल्प देने संबंधी अलग नीति का मसौदा तैयार किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पुनर्वास प्रक्रिया में होने वाली देरी रोकने के लिए प्रत्येक चरण की समय-सीमा तय की जाए। जिला स्तर पर लैंड बैंक की जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाए, इसके लिए राज्य स्तरीय ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया जाए तथा वैकल्पिक भूमि आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। इसके साथ ही विभागीय आयुक्त स्तर पर नियमित समीक्षा की व्यवस्था भी विकसित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में गांवठाण भूखंड आवंटन के लिए अलग कार्यप्रणाली तैयार करने, उपलब्ध गांवठाण भूमि का सर्वेक्षण एवं पंजीकरण करने तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। राज्यमंत्री जयसवाल ने कहा कि ‘विकसित महाराष्ट्र-2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए उद्योगों और बड़े विकास परियोजनाओं की आवश्यकता है, लेकिन विकास के साथ-साथ परियोजना प्रभावित नागरिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा करना भी सरकार की समान जिम्मेदारी है। इसलिए पुनर्वास प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, समयबद्ध और जनहितैषी बनाने के लिए सभी विभागों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा।

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