
मुंबई। पवित्र इस्लामी माह मुहर्रम के अवसर पर मुंबई में 25 और 26 जून को 10वीं मुहर्रम (यौम-ए-आशूरा) के मौके पर शहर के विभिन्न इलाकों में ताजिया जुलूस निकाले गए। हज़रत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में आयोजित इन धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और अमन, इंसानियत तथा भाईचारे का संदेश दिया। अफजल अब्बास सय्यद ने कहा कि मुहर्रम इमाम हुसैन की महान कुर्बानी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने न्याय, सत्य और इंसानियत के मूल्यों की रक्षा के लिए कर्बला की लड़ाई में अपने परिवार के 72 सदस्यों और साथियों के साथ शहादत स्वीकार की। उनके अनुसार, इमाम हुसैन का संदेश किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने बताया कि विभिन्न धर्मों के लोग भी मुहर्रम के जुलूसों और आयोजनों में शामिल होकर इमाम हुसैन की विरासत के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। मुहर्रम के अवसर पर निकाले जाने वाले ताजिए कर्बला के शहीदों के मकबरों का प्रतीक माने जाते हैं और शिया समुदाय के लिए उनका विशेष धार्मिक महत्व है।मुहर्रम के अवसर पर देशभर में शांति और सुरक्षा के बीच धार्मिक आयोजन संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं की गईं। वहीं धार्मिक नेताओं ने भी लोगों से आपसी सौहार्द, कानून का पालन और शांतिपूर्ण तरीके से धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करने की अपील की।



