
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हरित एवं ऊर्जा-कुशल परिवहन के विजन को आगे बढ़ाते हुए भारतीय रेल माल परिवहन क्षेत्र में बड़ा सुधार करने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में रेलवे बोर्ड ने वैगन डिज़ाइन नीति में व्यापक बदलाव का निर्णय लिया है। नई नीति अगले पखवाड़े में तैयार किए जाने की संभावना है। बैठक में रेल राज्य मंत्री वी.सोमन्ना, रवनीत सिंह बिट्टू, रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य तथा अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) के महानिदेशक सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। रेल मंत्रालय के अनुसार, विभिन्न उद्योगों, व्यापारिक संगठनों और प्रमुख माल ग्राहकों के साथ हुई चर्चाओं में यह सुझाव सामने आया कि यदि वैगनों को वस्तुओं की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप डिजाइन किया जाए, तो अधिक उद्योग रेल परिवहन को अपनाने के लिए तैयार होंगे। सीमेंट और नमक जैसी वस्तुओं के लिए विकसित विशेष वैगनों की सफलता का उल्लेख करते हुए रेलवे ने माना कि वस्तु-विशिष्ट वैगन माल परिवहन को अधिक कुशल, सुरक्षित और किफायती बनाते हैं। इसी अनुभव के आधार पर नई नीति तैयार की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत उद्योग अपनी आवश्यकताओं के अनुसार वैगनों का डिज़ाइन प्रस्तावित कर सकेंगे। उदाहरण के लिए स्टील कॉइल, सीमेंट, कृषि उत्पाद, रसायन तथा अन्य औद्योगिक वस्तुओं के लिए अलग-अलग प्रकार के विशेष वैगन विकसित किए जा सकेंगे। हालांकि सुरक्षा मानकों की निगरानी आरडीएसओ और संबंधित रेलवे सुरक्षा संस्थाएं करेंगी। रेल मंत्रालय का मानना है कि इस नीति से सड़क परिवहन से बड़ी मात्रा में माल रेल नेटवर्क पर स्थानांतरित होगा। इससे लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, आयातित डीज़ल पर निर्भरता घटेगी और कार्बन उत्सर्जन कम होगा। भारतीय रेल लगभग पूर्ण विद्युतीकरण की ओर बढ़ रही है। ऐसे में रेल आधारित माल परिवहन बढ़ने से देश के हरित विकास लक्ष्य को मजबूती मिलेगी और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। रेलवे बोर्ड का कहना है कि नई वैगन डिज़ाइन नीति नवाचार, ग्राहक सुविधा और उद्योग-अनुकूल परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। इससे भारतीय रेल राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के साथ-साथ विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



