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बीएमसी आर/मध्य विभाग के बेलगाम सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे की कार्यप्रणाली की कब होगी जांच?

क्या किसी बड़े हादसे के बाद होगी रघुलीला मॉल के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई?

बीएमसी कार्यालय में फेरीवालों से 500-500 रुपये की वसूली, कटघरे में सूर्यकांत कसारे की कार्यशैली


मुंबई। बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) की पहली महिला आयुक्त अश्विनी भिडे के नेतृत्व में प्रशासन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की बात कही जा रही है, लेकिन बीएमसी के आर/मध्य विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि सहायक आयुक्त एवं प्रभारी पदनिर्देशित अधिकारी (डीओ) प्रफुल तांबे अवैध निर्माणों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें संरक्षण दे रहे हैं। साथ ही बीएमसी निधि से होने वाले विकास कार्यों में कथित अनियमितता, कमीशनखोरी तथा फेरीवाला विभाग के माध्यम से अवैध वसूली के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कांदिवली पश्चिम स्थित रघुलीला मेगा मॉल में प्रथम एवं द्वितीय तल पर कई दुकानों (लगभग सभी) में कथित रूप से अवैध पोटमहाल (मेजेनाइन फ्लोर) बनाए गए हैं। मेजेनाइन फ्लोर का अवैध निर्माण इस मॉल में सामान्य हो गया है। पैसे कमाने के लालच में, दुकान के मालिकों ने अपनी दुकानों में मेजेनाइन फ्लोर बनाकर किराए पर दे दिए हैं। इस मॉल में लोगों की भारी आवाजाही होती है, और अतिक्रमण के कारण किसी बड़े हादसे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस मामले की जानकारी सहायक आयुक्त एवं प्रभारी पदनिर्देशित अधिकारी (डीओ) प्रफुल तांबे, सहायक अभियंता शिवराज कालगे तथा दुय्यम अभियंता अजय जगजाप को होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। कई बार विभागीय अधिकारियों और बीएमसी प्रशासन के वरिष्ठ स्तर तक मामला पहुंचाया गया, लेकिन हर बार केवल कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस मामले को ‘दैनिक स्वर्णिम प्रदेश’ पहले भी प्रमुखता से उठा चुका है। सोमवार को संवाददाता एस.के.तिवारी ने सहायक आयुक्त एवं प्रभारी डीओ प्रफुल तांबे से मुलाकात करने का प्रयास किया, लेकिन कार्यालय में नहीं होने से मुलाकात नहीं हो सकी। वहीं सहायक अभियंता शिवराज कालगे से मुलाकात हुई। हालांकि पिछले छह महीनों से कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कार्रवाई किसी संभावित हादसे के बाद ही होगी?
यही नहीं, सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उनके नेतृत्व में अधिकारी और कर्मचारी खुलेआम जनता से वसूली कर रहे हैं। जब संवाददाता एस.के.तिवारी वार्ड कार्यालय से बाहर निकल रहे थे, तभी तीन फेरीवाले मिले। उनका कहना था कि फेरीवाला विभाग के एक कर्मचारी ने उनसे 500-500 रुपये वसूल किए हैं। इस संबंध में जब वार्ड कार्यालय की दूसरी मंजिल पर स्थित फेरीवाला विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक सूर्यकांत कसारे से पूछा गया, तो उन्होंने आनाकानी की। हालांकि, फेरीवालों ने वहीं मौजूद उस कर्मचारी की पहचान कर ली, जिस पर पैसे लेने का आरोप था। इसके बावजूद सूर्यकांत कसारे ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई करने के बजाय फेरीवालों को उनके पैसे वापस करने की बात कही और पैसे वापस भी कर दिया। इससे उनकी कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि शिकायतकर्ताओं के आरोप सही हैं, तो यह मामला गंभीर जांच का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभागीय स्तर पर इस प्रकार की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। वहीं सामाजिक संगठन हक की हुंकार के अध्यक्ष दिनेश वर्मा ने कहा कि किसी भी व्यावसायिक परिसर में बिना अनुमति अतिरिक्त निर्माण सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विषय है। उनका कहना है कि यदि ऐसे निर्माणों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई और भविष्य में कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अब देखना यह है कि क्या बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे इस मामले का संज्ञान लेकर रघुलीला मेगा मॉल में कथित अवैध निर्माणों की जांच के आदेश देंगी, सहायक आयुक्त प्रफुल तांबे की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगी और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों तथा जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।

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