
मुंबई। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की 300 करोड़ वृक्षारोपण मुहिम के माध्यम से महाराष्ट्र को अधिक हरित और पर्यावरणीय रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। बोरीवली स्थित संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय कर्मचारी आवास परिसर का भूमिपूजन और पर्यावरण जागरूकता के लिए विशेष प्रचार वाहन का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती से निपटने के लिए वृक्षारोपण को जन आंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है।
वन्यजीवों के लिए लगाए जाएंगे फलदार वृक्ष, मुंबई को मिलेंगे एक लाख पौधे
वन मंत्री गणेश नाईक ने बताया कि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीवों को जंगल के भीतर ही पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने के लिए जामुन, अमरूद और कटहल जैसे फलदार वृक्ष बड़े पैमाने पर लगाए जाएंगे। इससे जंगली जानवरों के भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में आने की घटनाएं कम होंगी। उन्होंने बताया कि मुंबई की महापौर रितू तावड़े के अनुरोध पर सामाजिक वानिकी विभाग द्वारा मुंबई शहर के लिए एक लाख पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा राज्य में शुरू किए गए टिश्यू कल्चर केंद्रों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले पौधों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाएगा।
2047 तक विकसित भारत के लिए पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। विधायक मनीषा चौधरी ने प्रत्येक व्यक्ति से अपनी मां के नाम पर कम से कम एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने का आग्रह किया। वहीं विधायक प्रकाश सुर्वे ने बढ़ती गर्मी और जल संकट का समाधान वृक्षारोपण को बताया। वन विभाग के अधिकारियों ने जानकारी दी कि राज्य सरकार की 300 करोड़ वृक्षारोपण योजना के माध्यम से महाराष्ट्र में वन क्षेत्र को 33 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में 34 हेक्टेयर क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से घना शहरी जंगल विकसित किया जाएगा। वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को और व्यापक बनाना होगा तथा हर नागरिक को इस अभियान का भागीदार बनना होगा।



