
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्योग जगत को भरोसा दिलाते हुए कहा कि राज्य सरकार को केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं, बल्कि उद्योगों का साझेदार समझा जाए। महाराष्ट्र को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और आधुनिक लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में देश का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए सरकार हर संभव सहयोग देगी। शुक्रवार को मुख्यमंत्री की उपस्थिति में ‘वर्षा’ निवास पर महाराष्ट्र सरकार और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की अग्रणी कंपनी जबिल (Jabil) तथा दुबई स्थित आरएसए ग्लोबल के साथ दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य में 4,080 करोड़ रुपये का निवेश होगा और लगभग 4,750 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
पुणे में जबिल का 1,500 करोड़ रुपये का विस्तार, 4,000 लोगों को मिलेगा रोजगार
समझौते के तहत जबिल कंपनी पुणे में अपना इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) विस्तार परियोजना स्थापित करेगी। कंपनी 5जी उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित नेटवर्किंग स्विचगियर के उत्पादन के लिए 1,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना से करीब 4,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। जबिल पिछले 23 वर्षों से महाराष्ट्र में कार्यरत है और वर्तमान में राज्य में उसके 10 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। कंपनी की नई अत्याधुनिक उत्पादन इकाई 17 जून 2026 से शुरू होने वाली है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन क्षेत्र में यह निवेश महाराष्ट्र को तकनीकी और औद्योगिक दृष्टि से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।रायगढ़ में बनेगा अल्ट्रा मेगा लॉजिस्टिक्स पार्क, 2,580 करोड़ का निवेश
महाराष्ट्र सरकार और आरएसए लॉजिस्टिक्स एंड ट्रांसपोर्टेशन प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए दूसरे समझौते के तहत रायगढ़ जिले के उरण स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट प्राधिकरण (JNPA) क्षेत्र में 25 हेक्टेयर भूमि पर अत्याधुनिक अल्ट्रा मेगा लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित किया जाएगा। इस परियोजना में 2,580 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और इससे लगभग 750 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। पार्क में कंटेनर स्टैकिंग, कंटेनर धुलाई और सफाई, मरम्मत, खाली कंटेनरों का प्रबंधन और भंडारण जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों परियोजनाओं से महाराष्ट्र की औद्योगिक क्षमता, निर्यात क्षमता और लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही उच्च कौशल आधारित रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में महाराष्ट्र की अग्रणी पहचान और मजबूत होगी।



