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महाराष्ट्र में एफडीए की बड़ी कार्रवाई: मुंबई, भिवंडी और पालघर में छापे, 81 लाख का मेडिकल सामान जब्त

1.35 करोड़ के प्रतिबंधित स्टॉक की विक्री पर रोक

मुंबई। महाराष्ट्र के अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 तथा मेडिकल डिवाइस नियम 2017 का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए मुंबई, भिवंडी और पालघर में बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को एफडीए के सह आयुक्त (औषध) ने बताया कि इस कार्रवाई में लगभग 81 लाख रुपये मूल्य के सर्जिकल ग्लव्स और दवाओं का माल जब्त किया गया है, जबकि 1.35 करोड़ रुपये मूल्य के स्टॉक को जांच पूरी होने तक बिक्री और वितरण के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है। जांच के दौरान साकीनाका स्थित साची मेडिक नामक संस्था द्वारा बिना आवश्यक लाइसेंस और पंजीकरण के मलेशिया से बड़ी मात्रा में सर्जिकल ग्लव्स आयात कर उनकी बिक्री किए जाने का मामला सामने आया। एफडीए ने यहां से 74.85 लाख रुपये मूल्य के स्टेराइल और नॉन-स्टेराइल ग्लव्स जब्त किए हैं। जांच में यह भी पता चला कि इन उत्पादों की आपूर्ति मुंबई महानगरपालिका के अस्पतालों तक की गई थी।
भिवंडी और पालघर में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा
एफडीए की जांच का दायरा बढ़ने पर भिवंडी स्थित एक मेडिकल डिवाइस निर्माण इकाई में भी छापेमारी की गई। निरीक्षण के दौरान वहां गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS), मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और अन्य अनिवार्य दस्तावेजों का अभाव पाया गया। इसे जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानते हुए प्रशासन ने 9.88 लाख रुपये मूल्य के सर्जिकल ग्लव्स के स्टॉक को प्रतिबंधित कर दिया तथा उत्पादन बंद करने के आदेश जारी किए। वहीं पालघर जिले के वाडा स्थित मेडिअर्थ लाइफकेयर प्रा.लि. में सबसे बड़ा खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि कंपनी नॉन-स्टेराइल ग्लव्स खरीदकर बिना किसी स्टेरिलाइजेशन प्रक्रिया के उन्हें स्टेराइल बताकर सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को आपूर्ति कर रही थी। कंपनी संचालक ने इस संबंध में लिखित स्वीकारोक्ति भी दी है। इसके अलावा यहां से 1.26 करोड़ रुपये मूल्य के बैंडेज, कॉटन गॉज और अन्य मेडिकल सामग्री को प्रतिबंधित किया गया, जिन पर “Government of Maharashtra Supply – Not For Sale” अंकित था। साथ ही बिना वैध लाइसेंस के रखी गई 6.17 लाख रुपये मूल्य की एलोपैथिक दवाएं भी जब्त की गईं।
अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए एफडीए की चेतावनी
एफडीए के अनुसार संबंधित संस्थानों ने औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम, 1940, नियम 1945 तथा मेडिकल डिवाइस नियम 2017 के अनेक प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन किया है। चूंकि इन उत्पादों का उपयोग अस्पतालों और शल्य चिकित्सा में किया जाता है, इसलिए निम्न गुणवत्ता वाले या गैर-मानक उत्पाद मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। एफडीए ने सभी डॉक्टरों, अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों से अपील की है कि वे दवाएं और मेडिकल उपकरण केवल अधिकृत एवं लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही खरीदें। खरीद के समय लाइसेंस नंबर, बैच नंबर, निर्माण तिथि और समाप्ति तिथि की जांच अवश्य करें तथा फटे या संदिग्ध पैकिंग वाले सर्जिकल ग्लव्स और उपकरणों का उपयोग न करें। प्रशासन ने कहा है कि जब्त दस्तावेजों की विस्तृत जांच जारी है और यदि सरकारी अस्पतालों में गैर-मानक उत्पादों की आपूर्ति की पुष्टि होती है तो संबंधित संस्थाओं और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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