HomeMaharashtraआरटीआई व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता पर विस्तृत चर्चा

आरटीआई व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता पर विस्तृत चर्चा

मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे से सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली की सद्भावना भेंट

मुंबई। महाराष्ट्र राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे से सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सद्भावना भेंट की। इस दौरान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में महाराष्ट्र के विभिन्न सार्वजनिक प्राधिकरणों में दायर होने वाले आरटीआई आवेदन, प्रथम अपील एवं द्वितीय अपीलों की वर्तमान स्थिति, लंबित मामलों तथा नागरिकों को सूचना प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयों की समीक्षा की गई। साथ ही सूचना अधिकार व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और कार्यकुशलता लाने के लिए आवश्यक उपायों पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस अवसर पर अनिल गलगली ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) तथा मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के लिए स्वतंत्र ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल प्रारंभ करने हेतु राज्य सूचना आयोग द्वारा आवश्यक निर्देश जारी किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि राज्य के अनेक विभागों में ऑनलाइन आरटीआई व्यवस्था उपलब्ध है, किंतु मुंबई की इन दोनों महत्वपूर्ण संस्थाओं में अभी तक समग्र ऑनलाइन आरटीआई प्रणाली लागू नहीं होने के कारण नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी मांग की कि सूचना के अधिकार के अंतर्गत दायर आवेदनों, विभागों द्वारा दिए गए उत्तरों, उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों तथा निर्णयों का एक सार्वजनिक डेटाबेस तैयार किया जाए। इससे एक ही प्रकार की जानकारी के लिए बार-बार आवेदन करने की आवश्यकता कम होगी तथा प्रशासनिक पारदर्शिता को और अधिक मजबूती मिलेगी। चर्चा के दौरान एक ही आवेदक द्वारा हजारों की संख्या में दायर की जा रही द्वितीय अपीलों के बढ़ते मामलों पर भी चिंता व्यक्त की गई। इस प्रकार के मामलों से आयोग के कार्यभार में वृद्धि होती है तथा अन्य आवेदकों के मामलों के निपटारे में विलंब होने की संभावना रहती है। इस पर मुख्य सूचना आयुक्त राहुल पांडे ने कहा कि राज्य के सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 4 का कड़ाई से पालन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि नागरिकों को अधिकतम जानकारी स्वप्रकाशित (Proactive Disclosure) रूप में उपलब्ध कराने के लिए आयोग आवश्यक कदम उठा रहा है। उनका मानना है कि धारा 4 का प्रभावी क्रियान्वयन होने पर आरटीआई आवेदनों की संख्या में कमी आएगी और प्रशासन अधिक पारदर्शी तथा नागरिक-केंद्रित बनेगा।

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