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मराठा आरक्षण की मांग पर मनोज जरांगे का आमरण अनशन शुरू, सरकार से आर-पार की लड़ाई

जालना। मराठा आरक्षण और समाज की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में एक बार फिर आमरण अनशन शुरू कर दिया है। भीषण गर्मी के बीच खेत में खाट बिछाकर शुरू किए गए इस अनशन को उनका नौवां आमरण अनशन बताया जा रहा है। जरांगे ने स्पष्ट कहा है कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक वे न भोजन ग्रहण करेंगे, न पानी पिएंगे और न ही किसी प्रकार की सुविधा लेंगे। उन्होंने कहा कि यदि अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। अनशन शुरू होने के बाद मराठा समाज के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अंतरवाली सराटी पहुंचने लगे। बढ़ती गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन प्रदर्शन स्थल पर मेडिकल टीम भी तैनात की है। डॉक्टरों ने अनशन शुरू होने के बाद जरांगे का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस बीच महाराष्ट्र सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने आंदोलन स्थल पहुंचकर जरांगे से मुलाकात की और बातचीत की। उन्होंने कहा कि मराठा आरक्षण को लेकर सरकार का रुख सकारात्मक है तथा कई मांगों पर कार्रवाई जारी है। हालांकि जरांगे ने दो टूक कहा कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों के क्रियान्वयन का लिखित निर्णय चाहिए। जरांगे की प्रमुख मांगों में मराठा आरक्षण, हैदराबाद गजेट के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्रों का वितरण, 58 लाख कुणबी रिकॉर्डधारकों को प्रमाणपत्र देना, मराठा आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेना, सतारा और अन्य रियासतों के गजेटियर पर सरकारी प्रस्ताव जारी करना, मराठा-कुणबी मंत्रालय की स्थापना, सारथी संस्था की योजनाओं को पुनः शुरू करना, शिंदे समिति का कार्यकाल बढ़ाना तथा आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले परिवारों को सरकारी नौकरी देना शामिल है। अनशन के दौरान जरांगे ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले दस महीनों में उनकी किसी भी प्रमुख मांग पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुणबी प्रमाणपत्र वितरण की प्रक्रिया बाधित की गई है और सरकार को इस संबंध में तत्काल स्पष्ट आदेश जारी करने चाहिए। वहीं मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि कुणबी प्रमाणपत्र वितरण की प्रक्रिया जारी है और संबंधित अधिकारियों को किसी भी प्रकार की बाधा दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि मराठा आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज 668 मामलों में से 567 मामले वापस लिए जा चुके हैं, जबकि शेष मामलों पर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, जरांगे सरकार के इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने दोहराया कि सभी मामलों की पूर्ण वापसी तथा सभी मांगों के ठोस समाधान तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मराठा आरक्षण को लेकर राज्य में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

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