
आर.सूर्य कुमारी
दोस्तों आज हम बहुत ही आम मगर बहुत ही महत्वपूर्ण समस्या पर चर्चा करते हैं। मैं ही नहीं, आप भी बहुत गौर से देखते होंगे कि आज व्यक्ति समय से पहले वृद्ध होता चला जा रहा है। छोटी उम्र में ही किसी का दिल जवाब दे जाता है तो किसी को शुगर की शिकायत होने लगती है। एक तीस-चालीस साल के व्यक्ति में उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, थायराइड, स्नायु रोग आदि घर करने लगे हैं। तो अब सवाल यह उठता है कि आखिर क्या कारण है जो आज कम उम्र में बुढ़ापा घर कर रही है? इसके सबसे बड़े चार कारण हैं- एक, हमारा अत्यंत उपभोक्ता वादी होना। एक तो महंगाई का जमाना है। ऊपर से ऊंची पढ़ाई कर ऊंचे-ऊंचे मुकामों को छूने की लालसा। इस कश्मकश में हम शरीर को घोड़े से भी तेज दौड़ा रहे हैं। इतनी भागम भाग है कि सांस लेने की फुर्सत नहीं। इससे हमारा शरीर और हमारे शरीर के सारे अंग कमजोर पड़ जाते हैं और ताकत खोने लगते हैं। हमारे स्नायु तंत्र में भी शिथिलता आ जाती है और हम कमजोर पड़कर पस्त होने लगते हैं। दो, हमारे भोजन में पौष्टिकता का बहुत ज्यादा अभाव रहता है। नन्हे चावल से लेकर भीमकाय कटहल तक न जाने कितने खाद्य पदार्थ हैं जो कीट नाशकों के छिड़काव से उपजाए जाते हैं। गाय को आक्सीटोसिन की सुई लगाकर दूध दूहा जाता है। हमारे दुधारू पशुओं का चारा भी पौष्टिक नहीं होता। हमारा डेयरी उद्योग भी इस कारण स्वास्थ्य वर्धक नहीं रह जाता। लोगों को पौष्टिक आहार नहीं मिलता है तो वे बीमार पड़ जाते हैं और समय से पहले वृद्धावस्था में चले आते हैं। बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। तीन, हमारे यहां नशा बहुत ज्यादा किया जाने लगा है। एक किशोर पंद्रह – सोलह साल की उम्र से नशा करता है तो तीस साल के होते-होते वह इतना कमजोर पड़ जाता है कि आधा बूढ़ा हो ही जाता है। शराब, स्मैक, ब्राउन शुगर, गांजा, सिगरेट, इंजेक्शन। नशे का चाहे कोई भी तरीका हो शरीर को जीर्ण-शीर्ण कर डालता है। अनेक बीमारियां घर कर जाती है। वह काफी तकलीफ देह जिंदगी जीता है। चार, मानसिक रूप से भी हम इतने त्रस्त रहते हैं कि खुद को सम्हाल नहीं पाते। पति-पत्नी के बीच की लड़ाई, बच्चे हों तो भी समस्या, न हों तो भी समस्या। कमजोर शरीर और जिस पर मानसिक समस्याएं, जीवन को तंग कर डालती हैं, और तो और आज का आदमी अपनी चिंता नहीं करता, दस्तक दे रहे बुढ़ापे को गंभीरता से नहीं लेता, दूसरों को ज्यादा समझाइश देता है। जरूरत ना जरूरत की समस्याएं अपने दिमाग पर लेकर मानसिक शक्ति व मानसिक शांति खो बैठता है। इस कारण भी आयु घटने लगती है, बुढ़ापा घर कर जाती है। और, पानी में बहुत ज्यादा मात्रा में आर्सेनिक होना, और भी अनेक विषाक्त व खतरनाक रसायनों का होना आदि ऐसे कारण हैं जो समय से पहले बुढ़ापा या वृद्धावस्था को न्योता देते हैं। कुल मिलाकर एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए, एक स्वस्थ व्यक्ति को ही सोचना होगा। जहां हम सिस्टम को थोड़ा या ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकते वहां तो हमारी हार है, मगर जहां हम अपने हाथ-पैर मार सकते हैं, वहां जरूर प्रयत्न करना चाहिए। अपने जीवन को हम जितना सहूलियत दे सकते हैं, देना चाहिए। जिंदगी हमारी है तो पहली जिम्मेदारी व जिम्मेवारी भी हमारी ही है।




