
मुंबई। लिंग भेद को समाप्त करने और समाज में समानता की भावना विकसित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार के सहयोग से UNICEF और UNGEI (अंगाई) द्वारा धाराशिव जिले में ‘लिंग समभाव’ विषय पर एक अभिनव प्रकल्प चलाया जा रहा है, जिसका ग्रामीण समाज पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है। इस उपक्रम के तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए खेल-आधारित शिक्षण, संवाद और सहभागात्मक गतिविधियों का सहारा लिया गया है, जिससे किशोरवयीन लड़के-लड़कियों में समानता की समझ विकसित हो रही है। यह प्रकल्प महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग के अंतर्गत जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के सहयोग से देश में पहली बार प्रायोगिक रूप से धाराशिव में लागू किया गया, जिसमें 120 स्कूलों, 800 से अधिक शिक्षकों और 18,000 से ज्यादा विद्यार्थियों ने भाग लिया। कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए ‘मीना राजू मंच’ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लिंग समानता के विभिन्न पहलुओं को समझाया जा रहा है, जिसमें स्वयं शिक्षण प्रयोग (SSP), कोरो और मावा जैसी संस्थाओं का भी योगदान है। इस पहल का असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिख रहा है—आर्णी गांव की कक्षा 8 की छात्रा प्रज्ञा पाटोळे ने बताया कि उसने अपने परिवार में भी लिंग भेद के मुद्दे पर जागरूकता फैलानी शुरू की है और अब परिवार के लोग लड़कियों और लड़कों की जरूरतों को समान रूप से समझने लगे हैं। इस कार्यक्रम से लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे उच्च शिक्षा तथा बेहतर भविष्य के सपने देख रही हैं। प्रज्ञा ने डॉक्टर बनकर महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और मासिक स्वच्छता पर काम करने की इच्छा जताई है। अब वह गांव में बालसभा, स्कूल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लिंग समानता का संदेश भी दे रही है। इस पहल के माध्यम से यह स्पष्ट हो रहा है कि यदि बचपन से ही समानता के संस्कार दिए जाएं, तो समाज में व्यापक परिवर्तन संभव है। राज्य सरकार और सहयोगी संस्थाओं को उम्मीद है कि यह मॉडल भविष्य में अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा, जिससे समाज में स्त्री-पुरुष समानता को और मजबूती मिलेगी।




