
नई दिल्ली/अमरावती। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडबल्यू) की अध्यक्ष विजया राहटकर ने महाराष्ट्र के अमरावती जिले के बहुचर्चित ‘परतवाड़ा मामले’ की विस्तृत समीक्षा करते हुए जांच एजेंसियों को सख्त और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इस मामले में नाबालिग लड़कियों के कथित अश्लील वीडियो और तस्वीरें बनाकर उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए जाने के गंभीर आरोप हैं, जिसने पूरे राज्य में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। इस संवेदनशील मामले को लेकर आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें अमरावती शहर के पुलिस आयुक्त राकेश ओला, जिलाधिकारी आशीष येरेकर, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक विशाल आनंद और अचलपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. शुभम कुमार शामिल थे। बैठक में अब तक की जांच प्रगति, सबूतों की स्थिति और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस मामले में अब तक मुख्य आरोपी सहित कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), POCSO अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है। जांच को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए डॉ. शुभम कुमार के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। जांच के दौरान मोबाइल फोन, लैपटॉप और टैबलेट जैसे कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिन्हें विस्तृत विश्लेषण और साक्ष्य जुटाने के लिए फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफ़एसएल) भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इन उपकरणों से मामले से जुड़े कई अहम डिजिटल सबूत सामने आ सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विजया राहटकर ने यह सवाल उठाया कि क्या वर्तमान में लगाई गई धाराएं पर्याप्त हैं या और अधिक कड़े प्रावधान जोड़े जाने की जरूरत है। उन्होंने मीडिया रिपोर्टों और बरामद सामग्री के बीच संभावित अंतर पर भी चिंता जताई और सभी आपत्तिजनक सामग्री को खोजकर जब्त करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने इस पहलू की भी जांच करने को कहा कि क्या इस पूरे मामले में किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन या डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यावसायिक शोषण शामिल है। आयोग ने आरोपियों और उन स्थानों के बीच संबंधों की भी जांच पर जोर दिया, जहां कथित घटनाएं हुईं। पीड़ितों की सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एनसीडबल्यू ने स्पष्ट निर्देश दिए कि गवाह सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाए और मामलों की सुनवाई ‘इन-कैमरा’ (बंद कमरे में) की जाए, ताकि पीड़ित बिना किसी डर और सामाजिक दबाव के न्याय प्रक्रिया में शामिल हो सकें। आयोग ने यह भी चिंता जताई कि सामाजिक कलंक के कारण कई पीड़ित सामने आने से हिचक रहे हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित आपत्तिजनक सामग्री को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए आयोग ने महाराष्ट्र साइबर के साथ समन्वय कर सभी ऐसी सामग्री को स्थायी रूप से हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, फोरेंसिक जांच में तेजी लाने और हर पांच दिन में प्रगति रिपोर्ट आयोग को सौंपने को कहा गया है। अंत में राष्ट्रीय महिला आयोग ने दोहराया कि इस मामले की बारीकी से निगरानी की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी और समयसीमा के भीतर कार्रवाई हो, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और उनकी गरिमा की पूरी तरह रक्षा हो सके।




