
मुंबई। महाराष्ट्र राज्य के जीएसटी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में उल्लेखनीय राजस्व प्रदर्शन दर्ज किया है। वस्तु एवं सेवा कर (GST), मूल्यवर्धित कर (VAT) और प्रोफेशन टैक्स (PT) के माध्यम से राज्य को कुल 2,51,256 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष के 2,23,087 करोड़ रुपये की तुलना में 12.6 प्रतिशत अधिक है। राज्यों के बीच जीएसटी संग्रह में महाराष्ट्र ने देश में पहला स्थान हासिल किया है और दूसरे स्थान पर रहने वाले राज्य की तुलना में यहां का राजस्व दोगुने से भी अधिक है। राज्य का जीएसटी राजस्व भी 2024-25 के मुकाबले 14.6 प्रतिशत बढ़कर 1,86,991 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत है। यह वृद्धि राज्य की सशक्त अर्थव्यवस्था को दर्शाती है और राष्ट्रीय औसत की तुलना में लगभग दोगुनी मानी जा रही है। जीएसटी, वैट और प्रोफेशन टैक्स मिलकर राज्य के स्वमालकी कर राजस्व (SOTR) में लगभग 64 प्रतिशत का योगदान देते हैं, जिससे जीएसटी विभाग की वित्तीय मजबूती में अहम भूमिका स्पष्ट होती है। विशेष बात यह है कि विभाग ने लगातार चौथे वर्ष अपने बजट अनुमान को पार करते हुए 100.2 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया है। जीएसटी दरों के समायोजन से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद विभाग ने बेहतर अनुपालन और प्रभावी प्रशासन के जरिए 14.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। विभाग के अनुसार, यह सफलता देश में बढ़ते घरेलू उपभोग और कर प्रशासन की सक्रिय रणनीतियों का परिणाम है। डेटा आधारित निगरानी प्रणाली, उन्नत विश्लेषण, उच्च जोखिम वाले करदाताओं पर विशेष फोकस और ईमानदार करदाताओं के साथ सतत संवाद जैसे सुधारात्मक कदमों से राजस्व संग्रह में वृद्धि संभव हुई है। साथ ही, विभाग ‘Ease of Doing Business’ को बेहतर बनाने के लिए भी निरंतर प्रयास कर रहा है, जिससे व्यापारिक वातावरण को और अधिक सुगम बनाया जा सके।




