
हल्द्वानी, उत्तराखंड। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि धामी के नेतृत्व में राज्य ने शिक्षा, रोजगार और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और उत्तराखंड में अभूतपूर्व विकास देखने को मिला है। रक्षा मंत्री हल्द्वानी के एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘धुरंधर धामी’ की संज्ञा देते हुए कहा कि वे एक सक्षम और दूरदर्शी नेता हैं, जिन्होंने राज्य के विकास के लिए असाधारण कार्य किए हैं। राजनाथ सिंह ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और यह आस्था, संस्कृति और परंपराओं का केंद्र है, इसलिए इसकी पवित्रता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी को मिलकर उत्तराखंड की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धामी सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य में अवैध प्रवासियों के लिए कोई स्थान नहीं है और उनके नेतृत्व में 10,000 से अधिक अतिक्रमण हटाए गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री धामी की सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के प्रति विशेष संवेदनशीलता दिखाई है। चाहे आर्थिक सहायता प्रदान करना हो, शिक्षा में आरक्षण देना हो या रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, हर क्षेत्र में सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं। इस दौरान रक्षा मंत्री ने केंद्र सरकार की ‘वन रैंक, वन पेंशन’ योजना का भी उल्लेख किया और कहा कि यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई, जो देश के पूर्व सैनिकों की लंबे समय से लंबित मांग थी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार द्वारा पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के प्रति दिखाई गई चिंता सराहनीय है। अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने वैश्विक परिस्थितियों पर भी चर्चा की। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया संकट के दौर से गुजर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा शांति और समाधान की दिशा में रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को दोहराते हुए कहा कि युद्ध का समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से निकाला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार संभावित ऊर्जा और उर्वरक संकट जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और सक्रिय है। अंत में उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर उत्पन्न समस्याओं का स्थायी समाधान केवल बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है, और भारत इसी मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।




