
डिग्री के साथ कौशल भी महत्वपूर्ण, उद्यमी बनते समय टाटा को आदर्श रखें: उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन
मुंबई। भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी.राधाकृष्णन ने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे रोजगार में बदलना जरूरी है। तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स और बदलती तकनीक के अनुरूप खुद को ढालने की क्षमता ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने युवाओं से रतन टाटा को आदर्श मानते हुए लाभ के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया। शनिवार को वे रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल्य विद्यापीठ के पहले दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे, जो लोकभवन के दरबार हॉल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के पहले स्नातक इतिहास का हिस्सा बन गए हैं और वे भारत को ‘ग्लोबल स्किल हब’ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, ग्रीन एनर्जी और डेटा एनालिटिक्स जैसे आधुनिक विषयों को शिक्षा में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही जापान की प्रगति का उदाहरण देते हुए अनुशासन और समर्पण को सफलता का आधार बताया। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि आधुनिक विश्वविद्यालयों को नवाचार और प्रयोगशीलता को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कौशल विकास, पुनः कौशल और कौशल उन्नयन को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम बताया और छात्रों को निरंतर सीखते रहने की सलाह दी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केवल युवा जनसंख्या होना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे कौशल से लैस करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में ‘AI लिविंग लैब’ जैसे उपक्रमों के माध्यम से छात्रों को उद्योगों की वास्तविक समस्याओं को हल करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही 10,000 महिलाओं को एआई प्रशिक्षण देने की पहल को भी उन्होंने सराहा। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का 31% हिस्सा आकर्षित कर रहा है और आने वाले समय में राज्य वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत स्थिति हासिल करेगा। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने इस दीक्षांत समारोह को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छात्रों की मेहनत और उनके सपनों का सम्मान है। वहीं मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने कौशल विकास को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बताते हुए युवाओं को पारंपरिक कौशल और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर देने की सलाह दी। कुलगुरु डॉ. अपूर्वा पालकर ने बताया कि पहले दीक्षांत समारोह में 25,000 से अधिक छात्रों को डिग्री और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। विश्वविद्यालय ने 10,000 महिलाओं को एआई में प्रशिक्षित कर नया रिकॉर्ड बनाया है और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग भी स्थापित किया है। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का सम्मान किया गया। साथ ही ‘ड्रग्स को ना कहें’ अभियान का शुभारंभ भी किया गया। यह दीक्षांत समारोह न केवल छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा, बल्कि कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से राज्य और देश के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हुआ।




