
लड़कियों की 100 प्रतिशत और लड़कों की 50 प्रतिशत फीस माफ
मुंबई। राज्य में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया गया है। नई व्यवस्था के तहत छात्राओं को 100 प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी और छात्रों को 50 प्रतिशत ट्यूशन फीस माफी का लाभ दिया जा रहा है। यदि कोई महाविद्यालय इस निर्णय के बावजूद छात्रों से शुल्क वसूलता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने विधानसभा में दी।
शुक्रवार को विधानसभा सदस्य रईस शेख द्वारा लंबित शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति वितरण में आ रही समस्याओं को लेकर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री पाटिल बोल रहे थे। उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटिल ने बताया कि छात्रों को आवेदन प्रक्रिया में कई समय लेने वाली औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था, जिन्हें अब सरल बनाया गया है। छात्रवृत्ति आवेदन में मांगी जाने वाली जानकारी को 138 से घटाकर 66 कर दिया गया है, जबकि आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 17 से घटाकर 8 कर दी गई है। अब सीईटी (कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) का डेटा सीधे उपयोग किया जाएगा, जिससे छात्रों को बार-बार जाति प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने बताया कि महाविद्यालयों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहली किस्त का वितरण जल्द किया जाएगा। छात्रवृत्ति वितरण को वेतन से भी अधिक प्राथमिकता देने के निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्रियों द्वारा दिए गए हैं। इस व्यवस्था को जून महीने से लागू किया जाएगा। मंत्री पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के लिए ‘अर्न एंड लर्न’ जैसी नई योजना पर भी काम कर रही है, जिसके तहत लगभग 5 लाख छात्रों को हर महीने 2,000 रुपये अतिरिक्त मानधन देने का प्रस्ताव है। हालांकि इस योजना की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इस योजना के तहत छात्र विश्वविद्यालय या महाविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण, पुस्तकालय प्रबंधन या सामाजिक कार्यों में सहयोग करेंगे। इसके लिए सरकार, महाविद्यालय और सामाजिक संस्थाएं मिलकर निधि जुटाएंगी। इसके अलावा निर्वाह भत्ता योजना के तहत शहरों की श्रेणी के अनुसार छात्रों को 10 महीनों के लिए छात्रावास भत्ता दिया जा रहा है। इसके अनुसार मुंबई और पुणे जैसे शहरों में प्रति माह 6,000 रुपये (कुल 60,000 रुपये)। राजस्व विभाग मुख्यालय वाले शहरों में 5,100 रुपये प्रति माह और तालुका स्तर पर 4,800 रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं। मंत्री पाटिल ने यह भी बताया कि लंबित भुगतान समय पर करने के लिए कुछ वित्तीय संस्थानों, जैसे फेडरल बैंक, के साथ चर्चा चल रही है। इसके तहत सरकार ब्याज का भुगतान करेगी और वित्तीय संस्थान सीधे छात्रों या महाविद्यालयों की फीस का भुगतान करेंगे, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बावजूद यदि कोई महाविद्यालय छात्रों से अनुचित या अतिरिक्त शुल्क वसूलता है या प्रवेश प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है, तो ऐसे महाविद्यालयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही आवेदन पत्र भरते समय होने वाली त्रुटियों से बचाने के लिए राज्य में 40 सहायता केंद्र शुरू किए जा रहे हैं, जो छात्रों को फॉर्म भरने और तकनीकी समस्याओं के समाधान में मदद करेंगे। इस विषय पर हुई चर्चा में विधानसभा सदस्य सुधीर मुनगंटीवार और कैलास पाटिल ने भी भाग लिया।




