आश्रितों को पाँच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा

इंद्र यादव/मुंबई। महाराष्ट्र के नागपुर जिले में 1 मार्च 2026 की सुबह एक भीषण औद्योगिक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। शहर स्थित एक विस्फोटक कारखाने में हुए जोरदार धमाके में 15 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 18 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। विस्फोट इतना तीव्र था कि उसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई और कुछ ही पलों में इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय जब फैक्ट्री में कामकाज सामान्य रूप से चल रहा था, अचानक जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद चारों ओर धुएं का काला गुबार छा गया और अफरातफरी मच गई। मौके पर ही 15 मजदूरों ने दम तोड़ दिया। कई शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त अवस्था में मिले, जिन्हें देखकर राहतकर्मियों तक की आंखें नम हो गईं। घायल 18 मजदूरों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए असहनीय त्रासदी है जिनके कमाने वाले सदस्य रोजी-रोटी की तलाश में जोखिम भरे माहौल में काम करने को मजबूर थे। फैक्ट्री के बाहर अपनों का इंतजार करती माताएं, पत्नियां और बच्चे बिलखते नजर आए। कई मृतक अपने परिवार की इकलौती आर्थिक उम्मीद थे। इस विस्फोट ने न सिर्फ जिंदगियां छीनीं, बल्कि कई घरों के चूल्हे हमेशा के लिए बुझा दिए। हादसे के बाद प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया। वही नागपुर जिले के राऊळगांव स्थित एक विस्फोटक फैक्ट्री में हुए विस्फोट को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दुर्घटना में मृतकों के आश्रितों को पाँच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त संबंधित कंपनी भी मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस घटना की गहन जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वे लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं। जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। ‘पेसो’ (पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन) और ‘डिश’ (औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय) की टीमें भी वहां पहुंच चुकी हैं।




