
मुंबई। महाराष्ट्र में सर्पमित्रों—जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नागरिकों को सांपों से बचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं को अब सरकार से औपचारिक मान्यता और दुर्घटना बीमा सुरक्षा मिलने की संभावना है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि इन सर्प मित्रों के लिए एक समर्पित योजना बनाने हेतु वन विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री से अनुशंसा की जाएगी, ताकि उनके अथवा उनके परिवार के साथ किसी दुर्घटना की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके। राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रालय में सर्प मित्रों की विविध मांगों को लेकर आयोजित बैठक में वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मिलिंद म्हैसकर, राज्य वन्यजीव संरक्षक एम.श्रीनिवास राव और अखिल भारतीय सर्प प्रेमी एवं पशु प्रेमी संघ के अध्यक्ष डॉ. संभाजी पाटिल समेत कई प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि किसी सर्पमित्र की ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिवार को 10 से 15 लाख रुपए का बीमा मुआवजा दिया जा सकता है। इसके लिए वन विभाग मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखेगा। साथ ही, सर्पमित्रों को कार्य करते समय पुलिस हस्तक्षेप या अन्य परेशानियों से बचाने के लिए पुलिस सत्यापन, दिशा-निर्देश, पहचान पत्र और अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ता का दर्जा दिए जाने पर भी चर्चा हुई। राजस्व मंत्री ने सुझाव दिया कि सभी सर्पमित्रों की जानकारी एक केंद्रीकृत पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए और आपदा प्रबंधन विभाग उन्हें औपचारिक रूप से फील्ड वर्कर्स के रूप में मान्यता दे। वहीं, राज्य वन्यजीव संरक्षक एम.श्रीनिवास राव ने सर्पमित्रों से वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम का पूर्णतः पालन करने की अपील की और जिम्मेदारी से कार्य करने पर ज़ोर दिया। यह पहल महाराष्ट्र में सर्पमित्रों की निस्वार्थ सेवाओं को सम्मान देने और उन्हें संस्थागत समर्थन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




