
मुंबई। सोमवार सुबह से मुंबई, उसके उपनगरों और आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 27 मई सुबह 8:30 बजे तक रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में जलभराव से हालात बिगड़ गए हैं, जिससे न केवल सड़क यातायात, बल्कि सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
बेस्ट बस रूट डायवर्ट
मुंबई के सायन, गांधी मार्केट, वडाला, और हिंदमाता जैसे इलाकों में जलभराव के चलते बेस्ट बस प्रशासन को कई मार्गों को डायवर्ट करना पड़ा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने नागरिकों से बिना ज़रूरत घर से बाहर न निकलने की अपील की है और सभी से सहयोग करने का अनुरोध किया है।
बारिश के बीच सियासी आरोप-प्रत्यारोप
इस आपदा को लेकर राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने राज्य की महायुति सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार आज शब्दों और कार्यों दोनों में सचमुच डूब गई है। एक बारिश ने सरकार की तैयारियों की पोल खोल दी है। पटोले ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद मुंबई में जलनिकासी की व्यवस्था दयनीय बनी हुई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, मुंबई को जलमग्न करने के लिए सिर्फ एक बारिश ही काफी है। यह केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा सरकार को दी गई चेतावनी है।
प्रशासनिक लापरवाही का आरोप
नाना पटोले ने मंत्रालय परिसर जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक भवनों में पानी घुसने को लेकर भी सवाल उठाए और इसे सरकार की गंभीर लापरवाही और ढुलमुल रवैये का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने नदियों की सफाई और जल निकासी परियोजनाओं के नाम पर केवल सार्वजनिक धन की लूट की है।
किसानों की दुर्दशा पर चिंता
पटोले ने महाराष्ट्र में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि गेहूं, चना, मक्का, चावल और बागवानी फसलें बर्बाद हो गई हैं, लेकिन सरकार अब भी पिछले साल के मुआवज़े का भुगतान करने में विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वोटों के लिए किसानों का इस्तेमाल करती है, लेकिन संकट के समय उनकी मदद से पीछे हट जाती है।
स्थानीय निकाय चुनावों पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि महाराष्ट्र में चार साल से स्थानीय निकाय चुनाव क्यों नहीं हुए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप कर चुनाव कराने का आदेश देना पड़ा, जो लोकतांत्रिक ढांचे के लिए शर्मनाक है।




