
मुंबई। खुफिया जानकारी जुटाने और समन्वय को मज़बूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई पुलिस बल में संयुक्त पुलिस आयुक्त (खुफिया) के नए पद का सृजन किया है। यह पद विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरों, आतंकी गतिविधियों और स्लीपर सेल जैसी चुनौतियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्थापित किया गया है। 2006 बैच की आईपीएस अधिकारी डॉ.आरती सिंह, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की रहने वाली हैं और एमबीबीएस डिग्रीधारी हैं, को इस नवगठित पद पर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह विशेष पुलिस महानिरीक्षक के रूप में कार्यरत थीं। उनके पास विभिन्न संवेदनशील जिम्मेदारियों का अनुभव है, जो उन्हें इस नई भूमिका के लिए उपयुक्त बनाता है। यह नियुक्ति हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय स्लीपर सेल की आशंकाओं के बाद की गई है। अब तक मुंबई पुलिस में कानून व्यवस्था, अपराध, प्रशासन, आर्थिक अपराध और यातायात जैसे पांच क्षेत्रों में संयुक्त पुलिस आयुक्त पद थे। खुफिया विभाग के शामिल होने से यह अब बल का छठा प्रमुख कार्यक्षेत्र बन गया है। महत्वपूर्ण रूप से, विशेष पुलिस आयुक्त का पद समाप्त कर दिया गया है। पूर्व में सभी संयुक्त पुलिस आयुक्त विशेष पुलिस आयुक्त को रिपोर्ट करते थे, लेकिन अब से विशेष शाखा- जो खुफिया जानकारी जुटाने की मुख्य इकाई है। सीधे मुंबई पुलिस आयुक्त को रिपोर्ट करेगी। यह बदलाव संगठनात्मक पारदर्शिता और प्रतिक्रिया की गति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। इस निर्णय से न केवल मुंबई के खुफिया ढांचे को अधिक संगठित और प्रभावशाली बनाया गया है, बल्कि सुरक्षा दृष्टिकोण से राज्य सरकार के रणनीतिक सोच को भी दर्शाया गया है।



