
मुंबई। कटहल को एक लाभदायक नकदी फल फसल के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने गंभीर पहल करते हुए दापोली स्थित डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विश्वविद्यालय को एक सर्वसमावेशी योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश महाराष्ट्र के कृषि मंत्री ॲड. माणिकराव कोकाटे ने मंत्रालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में दिए। कटहल फल फसल अनुसंधान एवं विकास केंद्र की स्थापना को लेकर आयोजित इस बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि कटहल की विभिन्न किस्मों का गहन अध्ययन कर यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि राज्य के लिए कौन-सी किस्में सबसे अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि कटहल की बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए इसके व्यावसायिक उत्पादन, उच्च गुणवत्ता वाले कलमों की आपूर्ति, नर्सरी स्थापना और वैज्ञानिक अनुसंधान पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। बैठक में कृषि विभाग के प्रधान सचिव विकासचंद्र रस्तोगी, फलोत्पादन निदेशक डॉ. के. पी. मोते, कृषि विश्वविद्यालय दापोली के डॉ. पराग हलदणकर और झापडे स्थित जैकफ्रूट एग्रो प्रोड्यूसर कंपनी के प्रतिनिधि मिथिलेश देसाई उपस्थित थे। कृषि मंत्री कोकाटे ने यह भी कहा कि कटहल से बने विभिन्न उत्पादों के आधार पर फल एग्रो प्रोड्यूसर कंपनियों की गतिविधियों का विश्लेषण किया जाना चाहिए, ताकि यह समझा जा सके कि सरकार किस प्रकार सहायता प्रदान कर सकती है। उन्होंने दापोली कृषि विश्वविद्यालय को कटहल फसल से संबंधित सभी पहलुओं—जैसे खेती के लिए उपयुक्त क्षेत्र, प्रोसेसिंग, विपणन और मूल्य संवर्धन—पर आधारित संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगी और बजट में आवश्यक प्रावधान कर कटहल खेती के विकास के लिए ठोस निर्णय लेगी। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि कृषि विविधीकरण और ग्रामीण क्षेत्र के समग्र विकास को भी बढ़ावा देगी।



