
मुंबई। राज्य में मंदिरों के पास बड़ी मात्रा में भूमि मौजूद है, जिनका हाल के वर्षों में खरीद-बिक्री के माध्यम से निजी स्वामित्व में स्थानांतरण देखा गया है। इसे देखते हुए राज्य सरकार अब इन मंदिरों की भूमि से संबंधित एक स्पष्ट नीति तैयार कर रही है। इसी संदर्भ में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने निर्देश दिया है कि जब तक यह नीति तैयार नहीं हो जाती, तब तक राज्य में मंदिरों की जमीनों का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रोका जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति अथवा न्यायालय के आदेश के बिना कोई भी लेनदेन पंजीकृत नहीं किया जाना चाहिए, अन्यथा संबंधित उप-पंजीयक को उत्तरदायी ठहराया जाएगा। यह निर्देश पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान की भूमि के संदर्भ में मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में दिया गया। इस बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबिटकर, विधायक अमल महादिक तथा कोल्हापुर जिला कलेक्टर अमोल येडगे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित थे। मंत्री बावनकुले ने यह भी कहा कि मंदिरों की भेंट आय के प्रबंधन हेतु एक समुचित सरकारी नीति बनाई जा रही है ताकि इन आय स्रोतों का उचित उपयोग हो सके। इसके साथ ही उन्होंने कोल्हापुर शहर और उपनगरों को मानचित्र योजना में सम्मिलित करते हुए विस्तार योजना तैयार करने तथा अतिरिक्त ग्राम स्टेशनों का सर्वेक्षण कर संपत्ति कार्ड निर्गत किए जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।बैठक में उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि कोल्हापुर जिले के 100 गांवों को लेकर एक पायलट परियोजना तैयार की जाए, जिसके अंतर्गत डिजिटल सर्वेक्षण और मानचित्रण किया जाएगा। इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र के भू-अभिलेखों को अधिक पारदर्शी और अद्यतन बनाया जा सकेगा, जिससे भविष्य में भूमि विवादों को रोका जा सकेगा।



