
मुंबई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई महाराष्ट्र मंत्रिमंडल की बैठक में ‘फिरते पथक’ (मोबाइल टीम) योजना को राज्यभर में नियमित रूप से लागू करने की मंजूरी दी गई। इस योजना का उद्देश्य सड़क पर रहने वाले, अनाथ, अकेले या उपेक्षित बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और पुनर्वास की सुविधा देना है। योजना के तहत राज्य की 29 महानगरपालिकाओं में एक-एक और मुंबई महानगरपालिका के पूर्व एवं पश्चिम उपनगरों के लिए दो कुल 31 मोबाइल टीमों की शुरुआत की जाएगी। यह योजना पहले मिशन वात्सल्य के तहत मुंबई, ठाणे, पुणे, नागपुर और नासिक में प्रायोगिक रूप से शुरू की गई थी, जिसकी सफलता के बाद इसे राज्यभर में लागू करने का निर्णय लिया गया है। इस योजना के अंतर्गत बच्चों की सेवा के लिए विशेष रूप से अनुकूलित बसों/वैन का उपयोग किया जाएगा, जिनमें एक सलाहकार, शिक्षक, महिला कर्मचारी और चालक/सहायक की नियुक्ति होगी। बसों में जीपीएस ट्रैकिंग और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। हर बच्चे की सामाजिक जांच कर उसके लिए वैयक्तिक पुनर्वास योजना तैयार की जाएगी। उन्हें उम्रानुसार आंगनवाड़ी या स्कूल में दाखिला दिलाया जाएगा, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, पोषण, इलाज और स्वच्छता की आदतों के साथ-साथ नशामुक्ति पर भी ध्यान दिया जाएगा। कला और शैक्षणिक गतिविधियों में भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। योजना के क्रियान्वयन की निगरानी जिला महिला व बाल विकास अधिकारी द्वारा की जाएगी। संस्थाओं को तिमाही आधार पर निधि दी जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक माह कम से कम 20 प्रतिशत बच्चों का दाखिला स्कूलों में हो। यह पहल बाल अधिकारों की दिशा में राज्य सरकार का एक उल्लेखनीय और संवेदनशील कदम माना जा रहा है।



