
मुंबई। महाराष्ट्र के परभणी में 24 वर्षीय लॉ स्टूडेंट सोमनाथ व्यंकट सूर्यवंशी की कथित हिरासत में मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने पुलिस जांच की निष्पक्षता पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने सीआईडी को 8 मई तक जांच की किसी भी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से रोक दिया है। सोमनाथ की मौत 15 दिसंबर 2024 को न्यायिक हिरासत के दौरान परभणी के एक सरकारी अस्पताल में हुई थी। मजिस्ट्रेट जांच में पुलिस को उनकी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि सांप्रदायिक तनाव के बाद पुलिस ने सोमनाथ को हिरासत में लेकर क्रूरता से पीटा, जिसके चलते उनकी जान चली गई।
याचिका उनकी मां विजयाबाई सूर्यवंशी ने दायर की है, जिसमें स्वतंत्र और कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता के वकील प्रकाश अंबेडकर ने दलील दी कि पुलिस को दोषी ठहराने वाली मजिस्ट्रेट रिपोर्ट के बावजूद राज्य सरकार ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की है। उन्होंने जांच अधिकारी पर पूर्वग्रह से ग्रसित होने का आरोप भी लगाया। सरकार की ओर से बताया गया कि सीआईडी जांच जारी है, लेकिन कोर्ट ने नोटिस की भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि जांच का अधिकार राज्य सरकार को है, लेकिन वह पूर्वधारणा के साथ नहीं की जा सकती। यह घटना उस वक्त की है जब परभणी में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर की प्रतिमा के पास रखी संविधान की एक प्रतिकृति को क्षतिग्रस्त किए जाने के बाद सांप्रदायिक तनाव फैल गया था। इसके बाद 50 से ज्यादा युवाओं को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से कई ने हिरासत में अत्याचार की शिकायत की थी। सोमनाथ भी उन्हीं में से एक थे। प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, सोमनाथ की मौत “कई चोटों के कारण उत्पन्न सदमे” से हुई थी।




